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जागरण संवाददाता, करनाल : पूर्व केंद्रीय मंत्री सुषमा स्वराज ने 1980, 1984 व 1989 में करनाल लोकसभा से चुनाव लड़ा, लेकिन तीनों चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। लेकिन इन हार की वजह तीनों बार अलग अलग रही। तीसरी बार तो वह कम अंतर से हारी थीं। अलबत्ता वह चुनाव प्रचार के दौरान महिलाओं पर खासी छाप छोड़ती थी। वह चंद पल में ही अनजान को भी अपना बना लेती थी। यह बताते हैं प्रदेश के पूर्व उद्योग मंत्री शशीपाल मेहता। उनका कहना है कि सुषमा स्वराज जब भी करनाल आती थी तो सबसे पहले वर्करों का हालचाल जानती थी। वह उन वर्करों को बातचीत में जरूर याद करती थी तो जो चुनाव प्रचार के दौरान उनके साथ साथ रहते थे।

बिटिया को स्कूटर से लाता था घर

शशीपाल मेहता का कहना है कि सुषमा स्वराज ने जब करनाल लोकसभा से तीन दफा चुनाव लड़े तो वह तीनों बार सक्रिय तौर पर चुनाव प्रचार में साथ साथ रहे। उन्हें याद है कि चुनाव प्रचार के समय सुषमा स्वराज की बिटिया भी कई बार आ जाती थी। चुनावी सभा के बीच में से कई बार बिटिया को स्कूटर पर ही घर छोड़कर आते थे। करीब 10 बार आई घर

मेहता बताते हैं कि सुषमा स्वराज से उनके परिवारिक संबंध स्थापित हो गए थे। उन्हें मुझ पर पूरा यकीन था। वह उनके लगभग सभी परिवारिक समारोहों में भाग लेने आई। वह परिवार के सभी सदस्यों से स्नेह करती थी।

Posted By: Jagran

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