फ्लैग: हमारा पार्क हमारा हक

न झूले ठीक, न घास की हो रही कटाई, गंदगी के लगे हैं अंबार, पार्को से हरियाली भी गायब फोटो--20, 21, 26 व 28 नंबर है। 0 सेक्टर-4 और पांच को देख रही स्थानीय आरडब्ल्यूए, 32-33 में ठेकेदार और सेक्टर-16 और अटल पार्क का विभाग के कर्मचारी कर रहे रखरखाव जागरण संवाददाता, करनाल

शहर के पार्को के लिए एचएसवीपी के अधिकारी कितने गंभीर हैं, यह जानने के लिए काफी है कि पांच सेक्टर के 31 पार्को पर प्रति माह मात्र एक लाख रुपये खर्च हो रहा है। यानी प्रति पार्क 3225 रुपये। अब सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस पैसे से हरियाली कैसे होगी और रखरखाव कैसे। यही वजह है कि पार्क बदहाल हो रहे हैं। वह भी तब जब शहर प्रदूषण की चपेट में है। धुआं, धूल और प्रदूषण से दो चार हो रहे इस शहर में पार्को से उम्मीद होती है, शायद कुछ थोड़ी सी शुद्ध हवा मिल जाए। लेकिन एचएसवीपी अधिकारियों के कम बजट की वजह से वहां भी शुद्ध आक्सीजन की संभावना न के बराबर है। बदहाली की कहानी बयां कर रहे पार्क

पार्को में कहीं घास की नियमित कटाई नहीं हो रही तो कहीं गंदगी के अंबार हैं। कई पार्कों में तो झूले हैं ही नहीं और जहां हैं वहां रखरखाव नहीं। ये हालात पॉश एरिया के पार्को के हैं। 18 में से ये 11 सेक्टर हैं नगर निगम के अधीन

हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के शहर में कुल 18 सेक्टर हैं। इनमें से जुलाई 2016 तक विकसित क्षेत्र सेक्टर-6, 7, 13, सेक्टर-8 पार्ट-1 और 2, सेक्टर-9 पार्ट-1 और 2, सेक्टर-12 पार्ट-2, सेक्टर-14 पार्ट-1 और 2 और सेक्टर-13 एक्सटेंशन नगर निगम के पास हैं। जबकि सेक्टर-4 ट्रांसपोर्ट नगर और पार्ट-2, सेक्टर-5, सेक्टर-12 पार्ट-1, सेक्टर-16 व सेक्टर-32 और 33 एचएसवीपी के अधीन ही हैं। केवल अपने अधीन सेक्टरों के पार्को को डेवलप और रख-रखाव का जिम्मा एचएसवीपी के पास हैं। कॉमर्शियल क्षेत्र सेक्टर-12 पार्ट वन को छोड़कर अन्य पांच सेक्टरों में कुल 31 पार्क हैं। सेक्टर-32 और 33 के 9 पार्को के ठेकेदार ले रहा 70 हजार

शहर के सेक्टर-32 में सात और सेक्टर-33 में दो पार्क अभी बने हैं, लेकिन इनमें अभी न तो झूले हैं और न ही हरियाली के लिए पौधे लगाए हैं। इन पार्कों के रखरखाव का जिम्मा विभाग ने ठेकेदार को दिया है। इसे विभाग 211.35 रुपये प्रति 100 वर्ग मीटर सलाना के हिसाब से भुगतान कर रहा है। करीब 70 हजार खर्च करने के बाद भी यहां के पार्क बदहाल हैं। 18 हजार आरडब्ल्यूए को दे रहे, फिर भी सफाई नहीं

सेक्टर-4 ट्रांसपोर्ट नगर, पार्ट-2 और सेक्टर-5 में पार्को के रखरखाव का जिम्मा एचएसवीपी ने स्थानीय रेजिडेंट वेलफेयर को दिया है। यहां के सभी 16 छोटे-बड़े पार्को के रखरखाव के लिए विभाग इन्हें 1.35 रुपये प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से मासिक भुगतान करता है। इन पैसों से इन्हें पार्क में घास कटाई, सफाई आदि सभी कार्य पूरे करने होते हैं। हर माह तीनों सेक्टरों की आरडब्ल्यूए को करीब 18 हजार रुपये का भुगतान करता है। लेकिन लोग इनके काम से संतुष्ट नहीं हैं। सेक्टर-16 के छह पार्को में केवल दो माली

सेक्टर-16 में कुछ छह पार्क हैं। यहां के पार्कों का रखरखाव विभाग खुद कर रहा है। इनके लिए दो माली लगाए हैं। करीब 12 हजार रुपये इनकी सैलरी से अलग विभाग की ओर से खर्च किया जा रहा है। फिर भी हालात ठीक नहीं हैं। पेड़ों और घास की रेगुलर ट्री¨मग नहीं होती। पौधों और झूलों के लिए कोई बजट नहीं

एचएसवीपी की ओर से अपने 31 पार्को में हरियाली और झूले लगाने के लिए कोई विशेष बजट नहीं बनाया जाता। जेई विनोद ने बताया कि लोगों या आरडब्ल्यूए की डिमांड पर ही पौधे और झूले लगाए जाते हैं। लोगों का कहना है कि कई बार पार्को के सुधार और हरियाली के लिए अधिकारियों को शिकायत कर चुके हैं, लेकिन कभी कोई काम नहीं हुआ। बदहाली की कहानी लोगों की जुबानी

फोटो--21 नंबर है।

पार्क में न हरियाली न बेंच

सेक्टर-32 निवासी जेके शर्मा ने कहा कि यहां के पार्र्को में तो पौधे ही नहीं हैं। घास भी सूखती जा रही है। बैठने के लिए बैंच भी रखवाए जाने चाहिए। ठेकेदार पार्कों की डेवलपमेंट में कोई काम नहीं कर रहा। फोटो--23 नंबर है।

झूलों की ओर नहीं देते ध्यान

सेक्टर-5 निवासी सविता गर्ग ने बताया कि पार्को के झूले टूटे हैं। जहां खेलकर बच्चे भी चोटिल होते हैं। इन्हें ठीक कराया जाना चाहिए। फोटो--24 नंबर है।

ओपन जिम लगने की मांग

सेक्टर-5 निवासी रितु ने कहा कि सरकार टैक्स तो पूरा लेती है, लेकिन सुविधाएं पर्याप्त नहीं है। पार्को में ओपन एयर जिम लगाए जाने चाहिए। फोटो-- 25 नंबर है।

नहीं होता पार्को का रखरखाव

सेक्टर-5 निवासी नीलम ने कहा कि आरडब्ल्यूए के सदस्य भी पार्कों के रख-रखाव पर ध्यान नहीं देते। पता ने अधिकारी किस आधार पर उन्हें पैसे दे देते हैं। फोटो--27 नंबर है।

सफाई के इंतजाम नहीं

सेक्टर-4 निवासी ओमपति ने कहा कि पार्कों में गंदगी के अंबार लगे हैं। सफाई के अभाव में दिनभर धूल उड़ती है। वर्जन-

पार्कों के रखरखाव के लिए अलग-अलग व्यवस्था है। दो सेक्टर आरडब्ल्यूए के अधीन हैं। दो सेक्टर ठेकेदार को दिए गए हैं। जबकि सेक्टर-16 के पार्कों का रख-रखाव हमारे माली करते हैं। काम न होने की जानकारी मेरे संज्ञान में नहीं है। पार्कों के हालात देखने के बाद ही सभी को भुगतान किया जाएगा।

-कुलदीप, एसडीओ बागवानी, एचएसवीपी

Posted By: Jagran