संवाद सहयोगी, घरौंडा: बसताड़ा टोल पर कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसान सरकार को कोस रहे है। क्रमिक भूख हड़ताल को करीब दो माह का समय हो चुका है और सरकार और किसान अपनी-अपनी जिद्द पर अड़े हुए है। न सरकार पीछे हट रही है और न ही किसान। बसताड़ा टोल प्लाजा पर बैठे किसानों ने क्रमिक भूख हड़ताल के 59वें दिन सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और तीनों कृषि कानूनों को रद करने की मांग की। किसानों का कहना है कि सरकार कृषि सुधार के नाम पर किसानों को निजी बाजार के हवाले करना चाहती है और किसान ऐसा नहीं होने देंगे। रविवार को हसनपुर गांव के पांच किसान क्रमिक भूख हड़ताल पर बैठे। रमेश कुमार, दलबीर, रामफल, अनिल, दुलीचंद के नाम शामिल है। धरनास्थल पर बैठे किसानों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कानून कैंसिल किए जाने की मांग की है। भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष अजय सिंह राणा व हड़ताली किसानों ने कहा कि हाल ही में देश के बड़े-बड़े पूंजीपतियों ने रीटेल ट्रेड में आने के लिए कंपनियों का अधिग्रहण किया है। सबको पता है कि पूंजी से भरे ये लोग एक समानांतर मजबूत बाजार खड़ा कर देंगे। बची हुई मंडियां इनके प्रभाव के आगे खत्म होने लगेंगी। ठीक वैसे ही जैसे मजबूत निजी टेलीकॉम कंपनियों के आगे बीएसएनल समाप्त-सी हो गई। इसके साथ ही एमएसपी की पूरी व्यवस्था धीरे-धीरे खत्म हो जाएगी। कारण है कि मंडियां ही एमएसपी को सुनिश्चित करती हैं, फिर किसान औने-पौने दाम पर फसल बेचेगा। सरकार बंधन से मुक्त हो जाएगी, इस बार नरेंद्र मोदी किसानों को लूटने का कानून लाया है। उन्होंने कहा कि सरकार अब बातचीत के लिए आगे नहीं आ रही है। सरकार किसानों से बातचीत करे, क्योंकि बातचीत से ही समस्या का हल निकल पाएगा।

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