जागरण संवाददाता, करनाल :

कूड़ा उठान के कार्य में लगे वाहनों पर निगरानी बढ़ाने के लिए नगर निगम मौजूदा सिस्टम को ओर मजबूत करने जा रहा है। निगम आयुक्त विक्रम ने वीरवार को निगम कार्यालय में जीपीएस सॉफ्टवेयर बनाने वाली कंपनी विनेरा सॉफ्टवेयर प्राइवेट लिमिटेड के प्रतिनिधि के साथ बैठक कर मौजूदा सॉफ्टवेयर में कुछ नए फीचर जोड़ने के लिए कहा।

निगम आयुक्त ने बताया कि नए प्रावधान में जिओ फैंसिग होगी। वाहन का एरिया व रूट मार्क हो जाएगा। वाहन किस एरिया में घूम रहा है या अपने एरिया से बाहर है, उसका आसानी से पता चल सकेगा। उस वाहन की मानिटरिग हो सकेगी। ऑन रोड कितने वाहन हैं, कितने रूके हुए हैं, कितने खड़े हैं तथा कितनी दूरी तय कर रहे हैं, इस बात का अंदाजा लगाना आसान होगा। इन उपायों से वाहन की दैनिक मूवमेंट की रिपोर्ट मिलेगी।

आयुक्त ने बताया कि साफ्टवेयर में एडीशन से गाड़ी की मूवमेंट, आइडियल यानि स्टार्ट करके छोड़ देना और स्टाप या रूके रहने की चेकिग हो सकेगी। इसी के आधार पर वाहन चलाने वाले चालक या कर्मचारी को मासिक सैलरी दी जाएगी। निगरानी के दौरान यदि लापरवाही दिखाई दी तो वेतन में से कटौती होना भी तय रहेगा। बैठक में संयुक्त आयुक्त गगनदीप सिंह, कार्यकारी अधिकारी ईशा शर्मा, एई इलेक्ट्रिकल मनीष सिगला व एसएसआइ सुरेंद्र चोपड़ा उपस्थित रहे।

वाहनों की निगरानी करा रहा निगम

नगर निगम की तरफ से सफाई या कूड़ा उठाने के कार्य में लगे वाहनों पर जीपीएस से निगरानी की जा रही है। मौजूदा स्थिति के अनुसार 104 वाहन जीपीएस से युक्त हैं। इनमें 88 टिप्पर, 4 जेसीबी, 1 ट्रैक्टर-ट्राली व 5 डंपर प्लेसर के अतिरिक्त सिटी सर्विस में लगी 6 बसें भी शामिल हैं। कौन सा वाहन, किस लोकशन पर और क्या कार्य कर रहा है, उसकी निगरानी जीपीएस से ही संभव होती है। अब ऐसे वाहनों की निगरानी तंत्र को और मजबूत करने के लिए नगर निगम आयुक्त इसे और पारदर्शी बनाने का प्रयास कर रहे हैं।

क्या है जीपीएस

जीपीएस एक ग्लोबल नेविगेशन सेटेलाइट सिस्टम है, जो किसी भी चीज की लोकेशन का पता करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। प्रारंभ में यह सिस्टम सेनाओं के इस्तेमाल के लिए बनाया गया था। वर्तमान में यह हमारे मोबाइल में भी देखने को मिलता है। इस टेक्नोलॉजी का सबसे ज्यादा इस्तेमाल नेविगेशन यानि रास्ता ढूढ़ने के लिए किया जाता है। यह सिस्टम ट्रांसपोर्ट में ज्यादा इस्तेमाल होता है।

Edited By: Jagran