जागरण संवाददाता, करनाल

सोलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट जिस तरीके से वर्किंग होना चाहिए उस दिशा में काम करने के लिए नगर निगम विचार कर रहा है। प्लांट की क्षमता रोजाना 150 टन कचरा प्रोसिसग करने की है, लेकिन करनाल से निकलता रोजाना 200 टन के करीब है। ऐसे में प्लांट की क्षमता बढ़ाने के विचार के साथ यहां पर तैयार आरडीएफ यानि रिफ्यूज ड्राइव फ्यूल अंबाला एनर्जी टू वेस्ट के रूप में अंबाला शिफ्ट किया जाएगा। इसके लिए प्लानिग चल रही है, जो जल्द मूर्त रूप लेगी। यहां पर करनाल के अलावा घरौंडा, इंद्री, तरावड़ी, निसिग, नीलोखेड़ी व पुंडरी (कैथल) के कचरे का भी मैनेजमेंट होगा। इस तरह से प्रतिदिन इन शहरों से निकलने वाले 300 टन कचरे का करनाल में न केवल मैनेजमेंट होगा, बल्कि जैविक खाद के साथ-साथ रिफ्यूज ड्राइव फ्यूल (आरडीएफ) भी तैयार किया जाएगा। यह आरडीएफ वेस्ट टू एनर्जी के लिए अंबाला में पहुंचाया जाएगा, जहां पर यह बिजली बनाने के काम आएगा। टेंडर फ्लोट किए गए थे, लेकिन व्यवस्था नहीं चढ़ पाई थी सिरे

डीयूएलबी की ओर से अंबाला नगर निगम को टेंडर की जिम्मेदारी दी गई है। तीन जिलों में कचरा प्रबंधन की व्यवस्था के लिए गत मार्च माह में टेंडर फ्लोट किए गए थे, लेकिन किन्हीं कारणों से व्यवस्था सिरे नहीं चढ़ पाई थी। नई व्यवस्था में पहले करनाल लाना होगा कचरा

इसके लिए पहले सभी क्षेत्रों का कचरा करनाल लाना होगा और फिर सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट में तैयार होने वाले सूखे ईंधन को अम्बाला लिफ्ट करना होगा। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट से जुड़े कर्मचारियों के अनुसार लिफ्ट की दूरी अधिक होने के कारण ही शायद कांट्रेक्टर टेंडर भरने के लिए आगे नहीं आ रहे हैं। क्योंकि पूरा कचरा वाहनों में इधर से उधर पहुंचाना होगा। टेंडर के बाद बढ़ानी होगी प्लांट की क्षमता

टेंडर के बाद सभी जगह का कचरा आने से प्लांट की क्षमता को भी बढ़ाना होगा। अभी यहां सिर्फ 150 टन कचरे का शोधन होता है, लेकिन जब सभी जगह से कचरा शोधन के लिए यहां आने लगेगा तो यह 300 टन हो जाएगा। ऐसे में प्लांट की क्षमता भी बढ़ानी पड़ेगी। अधिक मात्रा में तैयार होगी जैविक खाद

चीफ सेनेटरी इंस्पेक्टर सुरेंद्र कुमार के मुताबक सभी जगह के कचरे का करनाल में मैनेजमेंट करने पर अधिक मात्रा में जैविक खाद तैयार होगी। इस तरह से जैविक खाद को बेचने का चैलेंज भी संबंधित कंपनी के सामने होगा, क्योंकि अभी से जो जैविक खाद तैयार होती है उसके प्रयोग को लेकर भी किसान अधिक जागरूक नहीं हैं।

Posted By: Jagran

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