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Haryana News: यमुना में बाढ़ से बचाव की तैयारी तेज, डेडलाइन गुजरने के बाद प्रशासन हुआ अलर्ट

हरियाणा में मानसून आने के साथ ही यमुना क्षेत्र में बाढ़ बचाव कार्यों में तेजी आई है। यमुना नदी से लगते करनाल जिले के लालूपुरा घाट पर रिवटमेंट का काम शुरू हो चुका है। हालांकि इस काम के लिए निर्धारिक की गई समय सीमा बीत चुकी है। पिछले साल यमुना में आई बाढ़ से किसानों को बहुत नुकसान उठाना पड़ा था।

By Jagran NewsEdited By: Rajiv Mishra Thu, 11 Jul 2024 08:34 AM (IST)
बाढ से बचाव के लिए यमुना किनारे सिचाई विभाग की ओर से कराया जा रहा कार्य

संवाद सहयोगी, घरौंडा। निर्धारित डेडलाइन बीतने के बाद आखिरकार अब जाकर यमुना क्षेत्र में बाढ़ बचाव के कार्यों में तेजी आई है। इसके तहत लालूपुरा गांव के नजदीक यमुना नदी के तटबंध मजबूत करने का कार्य शुरू कर दिया गया है। विभाग का दावा है कि एक सप्ताह में काम पूरा कर दिया जायेगा।

ग्रामीणों ने ली राहत की सांस

यमुना के तटबंध मजबूत होने की प्रक्रिया में तेजी से आसपास के ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। हालांकि पहले 30 जून और फिर सात जुलाई की डेडलाइन तय थी। यह समय बीतने के बाद बाढ़ बचाव के कार्यों में तेजी आई है।

यमुना से लगते करनाल जिले के सबसे संवेदनशील प्वाइंट लालूपुरा घाट पर रिवटमेंट का काम शुरू हो चुका है। करीब 3300 फिट लंबे तटबंध का काम एक सप्ताह में पूरा करने का दावा है।

पिछले साल मची थी तबाही

लालूपुरा के सरपंच और ग्रामीणों ने बताया कि बीते साल यमुना में आई बाढ़ से बड़ी तबाही हुई थी। किसानों के सैकड़ों एकड़ खेत बाढ़ की भेंट चढ़ गए थे। इस बार भी लोगों में बाढ़ को लेकर आशंका है। हालांकि अब विभाग ने बाढ़ बचाव के कार्यों में तेजी ला दी है। उम्मीद है कि यमुना में जलस्तर बढ़ने से पहले काम पूरे हुए तो गांव बाढ़ से बच जाएंगे ।

सैकड़ों एकड़ फसल हुई थी बर्बाद

यमुना पर तटबंध बांधने का काम समय पर पुरा न होने से गत वर्ष अचानक आए पानी से यमुना में बाढ़ आ गई थी। गांव लालूपुर के आसपास के क्षेत्र में सैकड़ों एकड़ फसल बाढ़ की भेंट चढ़ गई थी और आसपास खेती करने वाले किसानों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा था। हालांकि प्रशासन ने करीब एक माह तक तट पर कार्य करके पानी गांव में आने से रोक लिया था लेकिन फसलों का नुकसान हो गया था।

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नहीं मिला फसलों का मुआवजा

गांव लालूपूरा व आसपास के ग्रामीणों का कहना है कि पिछले वर्ष बाढ़ में खेतों में फसलें तबाह होने के बावजूद किसी भी प्रशासनिक अधिकारी ने न तो उनकी सुध ली और न मुआवजा ही मिला। फसलें नष्ट होने के कारण वे कर्जदार हो गए हैं। प्रशासन को उनकी मदद करनी चाहिए।

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