जागरण संवाददाता, करनाल : सिविल सर्जन करनाल डा. योगेश शर्मा ने बताया कि प्रदेश में जनवरी 2010 से कोई पोलियो केस नहीं हुआ है। जबकि भारतवर्ष में जनवरी 2011 से पोलियो का कोई केस नहीं मिला है। इसलिए भारत को पोलियो मुक्त घोषित कर दिया गया है, परंतु पड़ोसी देशों में अभी भी पोलियो के केस मिल रहे हैं, जिसकी वजह से भारत में पोलियो केस का खतरा बना रहता है। भारत में कोई भी पोलियो केस ना हो, इसलिए भारत से बाहर जाने वाले व भारत में आने वाले व्यक्ति को पहले पोलियो की खुराक पिलाई जाती है।

वह स्वास्थ्य विभाग करनाल द्वारा बुधवार को सीटीएम विजया मलिक की अध्यक्षता में सब-नेशनल पल्स पोलियो कार्यक्रम के संदर्भ में आयोजित जिला टास्क फोर्स की बैठक में विचार रख रहे थे। इस बैठक में रोहतक मेडिकल कालेज से आए डब्ल्यूएचओ के प्रतिनिधि डा. अविरल शर्मा ने बताया कि प्रदेश के 13 जिलों में 20 से 22 सितंबर तक सब-नेशनल पल्स पोलियो अभियान चलाया जाएगा। इसमें हाई रिस्क एरिया में दवा पिलाई जाएगी, जिसमें कंटेनमेंट जोन भी शामिल हैं। अबकी बार भट्ठे, डेरे, फैक्ट्रियां, राइस मिल्स, स्लम एरिया में रह रहे बच्चों को पोलियो की बूंदें पिलाई जाएंगी, क्योंकि ऐसी जगह पर माइग्रेटरी पोपुलेशन होती है, जहां पर पोलियो फैलने का खतरा सबसे अधिक होता है।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2010 में हरियाणा तथा वर्ष 2011 में भारत वर्ष का आखिरी पोलियो केस भी माइग्रेटरी पापुलेशन का ही था। उन्होंने जिलावासियों से अपील की कि सभी अभिभावक अपने 0 से 5 साल के बच्चों को 20 सितंबर को नजदीकी बूथ पर पहुंचकर पोलियो की बूंदे अवश्य पिलवाएं।

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