जागरण संवाददाता, करनाल : अब तक देशभर में मानसून के प्रदर्शन पर गौर किया जाए तो औसत से 7 फीसदी अधिक बरसात हुई है। दक्षिण भारत के क्षेत्रों में औसत से 28 फीसदी अधिक बरसात दर्ज की गई है। मध्य भारत में 14 फीसदी बरसात की अधिकता है, जबकि उत्तर पश्चिमी क्षेत्र में बीते दो सप्ताह में यहां पर जितनी बरसात होनी थी, चाहे वह पंजाब हो, हरियाणा, दिल्ली, एनसीआर, जम्मू-कश्मीर आदि क्षेत्रों में 10 दिन से बरसात नहीं हुई है। पूर्वी तथा पूर्वोत्तर राज्यों में बरसात का आंकड़ा सामान्य से एक फीसदी अधिक बना हुआ है। मौसम विभाग की मानें तो इस बार मानसून तय समय से 10 दिन देरी से विदा होगा। 30 सितंबर तक मानसून प्रदेश को अलविदा कह सकता है। राजस्थान से मानसून विदाई की उम्मीद 15 सितंबर लगाई गई थी। इसी प्रकार हरियाणा व दिल्ली से मानसून 21 सितंबर को विदा होने की संभावना जताई गई थी। लेकिन बंगाल की खाड़ी में बना साइक्लोनिक सर्कुलेशन यदि उत्तर-पश्चिमी दिशा की ओर आगे बढ़ता है तो संभवत मानसून 30 सितंबर के बाद विदाई ले सकता है। यानि 10 दिन की देरी से जा सकता है। आने वाले दिनों में क्या रहेगी स्थिति

बंगाल की खाड़ी से जो साइक्लोन सर्कुलेशन बना था और आगे बढ़ते-बढ़ते आंध्र प्रदेश से होते हुए आगे बढ़ा था, लेकिन अब वह कमजोर पड़ चुका है। उत्तर भारत के राज्यों में फिलहाल मानसून कमजोर रहेगा, बरसात के आसार नहीं हैं। 18 सितंबर को हरियाणा, पंजाब, दिल्ली एनसीआर में बादल छा सकते हैं और हल्की बूंदाबांदी हो सकती है। 19 व 20 सितंबर को बंगाल की खाड़ी में बनने वाले साइक्लोनिक सर्कुलेशन का भी कुछ असर उत्तर भारत के राज्यों में देखने को मिल सकता है। अभी उमस व गर्मी ने किया बेहाल

करीब 10 दिन से उत्तर भारत के क्षेत्रों में बरसात नहीं हुई है। जिससे मौसम गर्म व शुष्क हो गया है। वीरवार को अधिकतम तापमान 35.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, वहीं न्यूनतम तापमान 26.2 डिग्री सेल्सियस रहा। जो सामान्य से 3.0 डिग्री अधिक है। सुबह के समय नमी की मात्रा 92 फीसदी दर्ज की गई। हवा 3.2 किलोमीटर प्रतिघंटा की औसत रफ्तार से चली। केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान के मुताबिक आने वाले 24 घंटे में मौसम साफ व शुष्क बना रहेगा। अभी उमस व गर्मी का सामना लोगों को करना पड़ेगा।

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