जागरण संवाददाता, करनाल: सेक्टर-14 राजकीय महाविद्यालय में शारीरिक अक्षमता के प्रति सामाजिक ²ष्टिकोण विषय पर कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय कुरुक्षेत्र के अंग्रेजी विभाग के प्रो. डॉ. रामनिवास ने मुख्य वक्ता के रूप में विस्तार व्याख्यान दिए। प्रो. रामनिवास ने कहा कि शारीरिक अक्षमता कोई व्याधि नहीं है अपितु परिस्थिति मात्र है। कोई स्वस्थ व्यक्ति भी भिन्न-भिन्न प्रकार की शारीरिक अथवा मानसिक अक्षमता की स्थिति में किसी दुर्घटना के कारणों के कारण पहुंच सकता है। एक बेहतर समाज की बुनियाद में संवेदनशील मनुष्य का होना बहुत जरूरी है और यह हम सबका दायित्व है कि भिन्न रूप से सक्षम व्यक्तियों की भिन्न रूपेण आवश्यकताओं को समझा और उसे पूरा किया जाए। इमारतों, याततायत के साधनों, सड़कों और परिवहन संकेतों में कुछ छोटे-छोटे परिवर्तन करके सबके लिए सहज व्यवस्था का निर्माण किया जा सकता है। प्रो. रामनिवास से पूर्व उनकी पत्नी और प्रो पुष्पा शर्मा ने भी विद्यार्थियों को व‌र्ल्ड वाइट केन डे मनाने के उद्देश्य और अक्षमता के वैश्विक परिदृश्य पर प्रकाश डाला और कहा कि अक्षमता को दया की नहीं संवेदनशील दृष्टिकोण की आवश्यकता है।

श्रृंखला की अध्यक्षता महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. रेखा शर्मा ने की। उन्होंने कहा कि किसी को अक्षम कहना तार्किक रूप से गलत है, असल में सभी व्यक्ति किसी न किसी भिन्न रूप से सक्षम होते हैं।

Posted By: Jagran

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