जागरण संवाददाता, करनाल: सेक्टर-13 निवासी शिक्षक दंपती देवेंद्र मोहन सिंह और संध्यादीप कौर की होनहार बेटी अभिजीत को शुरुआत से यकीन था कि कड़ी मेहनत के बूते एक न एक दिन वह अपना लक्ष्य अवश्य हासिल करेंगी। बिहार लोक सेवा आयोग परीक्षा में अपने पहले ही प्रयास में शानदार रैंक हासिल करने के साथ ही यह सपना साकार हो गया है। जल्द ही अभिजीत बिहार पुलिस में उपाधीक्षक बनकर एक बार फिर साबित करेंगी कि बेटियां किसी से कम नहीं होतीं।

अभिजीत बचपन से ही यह सपना सच करने की दिशा में आगे बढ़ रही थीं। कड़ी मेहनत के बूते आखिरकार लक्ष्य प्राप्ति में सफलता हासिल हो गई। इससे उत्साहित अभिजीत ने कहा कि अक्सर पुलिस को अपनी छवि पर दाग लगने के कारण आलोचनाओं का सामना करना पड़ता है। भरसक प्रयास रहेगा कि पूरी ईमानदारी से कार्य करके पुलिस की छवि बेहतर बनाने में यथासंभव योगदान कर सकूं। युवाओं के लिए अभिजीत ने कहा कि कभी हार न मानें। चुनौतियों से न घबराएं। उन्होंने भी कई असफलताओं के बावजूद जीतोड़ प्रयास किए। इसी का सकारात्मक परिणाम रहा कि पहले ही प्रयास में सफलता मिली।

अभिजीत ने बताया कि रांवर गांव के विद्यालय में राजकीय शिक्षक पिता देवेंद्र मोहन सिंह प्रतियोगी परीक्षाओं पर निरंतर निगाह रखते थे। वह नियमित रूप से प्रतिदिन छह-सात घंटे पढ़ाई करती थीं। कई बार 12 घंटे तक भी पढ़ाई की। पटना में एक संस्थान से कोचिग ली। आरंभिक शिक्षा करनाल में लेने के बाद दिल्ली में स्नातक और परास्नातक की पढ़ाई की।

अभिजीत के पिता देवेंद्र मोहन ने बताया कि बेटी बचपन से लक्ष्य हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत कर रही थी। बुलंद आत्मविश्वास और कड़ी मेहनत के बूते उसे सफलता मिली। माता संध्यादीप, नानी प्रकाश कौर, भाई आकाश दीप और शिक्षक मिहिर बनर्जी सहित पूरे परिवार ने इसे गौरवपूर्ण उपलब्धि करार दिया।

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स्वजनों व शिक्षकों को बिटिया पर गर्व

अभिजीत की नानी 78 वर्षीय प्रकाश कौर ने बताया कि उसने पूरी लगन से पढ़ाई की। उन्हें अभिजीत और तमाम होनहार बेटियों पर गर्व है। अभिजीत की मां संध्यादीप कौर राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल में शिक्षिका हैं। उन्होंने बताया कि सेंट थेरेजा स्कूल में आरंभिक पढ़ाई के समय भी अभिजीत का लक्ष्य पर फोकस था। कक्षा पांच में ही हैड गर्ल बन गई थी। वह बहुत अनुशासित छात्रा रही। अब अभिजीत बिहार की धरती पर पुलिस सेवा में नए आयाम स्थापित करेगी। अभिजीत के पिता देवेंद्र मोहन सिंह ने बताया कि इंटरव्यू में बेटी ने फील्ड वर्क से लेकर फिटनेस तक पूछे गए सवालों के प्रभावी जवाब दिए। बचपन से मन में कायम आत्मविश्वास उसकी सफलता का बड़ा फैक्टर है। अभिजीत के परदादा सरदार जसवंत सिंह भी डीएसपी थे, जो अपने दौर में दिल्ली कोतवाली में तैनात थे। अभिजीत और पूरा परिवार उन्हें आदर्श मानता है। इससे भी उसे अपना लक्ष्य तय करने की प्रेरणा मिली। एम्स से एमबीबीएस कर रहे अभिजीत के भाई आकाश दीप सिंह, शिक्षक मिहिर बैनर्जी और अन्य स्वजनों ने भी खुशी जताई।

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किरण बेदी से प्रेरित

परीक्षा में 1400 में 130वीं रैंक हासिल करने वाली अभिजीत ने बताया कि पुलिस सेवा को अलग आयाम देने वालीं किरण बेदी से वह काफी प्रभावित हैं। उनके बारे में स्कूल लाइब्रेरी में पढ़ा तो बहुत रोमांचित हुईं कि किस तरह उन्होंने तिहाड़ जेल को सही मायने में सुधारगृह के रूप में तब्दील किया। पुलिस सेवा में कार्यरत रिश्तेदारों से भी जरूरी टिप्स हासिल किए। इससे काफी मदद मिली। दादा, माता-पिता और शिक्षकों ने भी भरपूर मार्गदर्शन किया।

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