जागरण संवाददाता, करनाल : आशा वर्कर यूनियन हरियाणा की राज्य कमेटी के फैसले के अनुसार जिला करनाल की तमाम आशा वर्कर 26 नवंबर की राष्ट्रव्यापी हड़ताल में शामिल होंगी। आशा वर्करों के लंबे आन्दोलन व रैलियों के बावजूद सरकार ने यूनियन को बैठक के लिए लिखित पत्र देने के बावजूद भी मुख्यमंत्री हरियाणा ने बातचीत करने से मना कर दिया। सरकार का महिलाओं के प्रति नकारात्मक रवैया उजागर हो गया है। जिला प्रधान सुदेश व रोशनी ने खुखनी, इंद्री व घीड पीएचसी में मीटिग करने के बाद बताया कि आशा वर्करो में हड़ताल को लेकर भारी उत्साह है। राज्य कि 20 हजार आशा वर्कर्स लंबे समय से आंदोलन पर है। राज्य सरकार ने अभी तक मांगो का समाधान नहीं किया।

आशा वर्करों की ये हैं मुख्य मांगें

-जनता को गुणवता स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करने हेतू सरकारी स्वास्थ्य के ढ़ाचें को मजबूत किया जाए व एनएचएम को स्थाई किया जाए।

-आठ एक्टिविटी का काटा गया 50 प्रतिशत पैसा जो 2019 तक मिलता रहा था इसे तुरंत वापस लागू किया जाए।

-कोविड-19 में काम कर रही आशाओं को जोखिम भत्ते के तौर पर 4000 दिए जाएं। कोविड-19 के लिए केन्द्र की ओर से दिए जा रहे 1000 प्रोत्साहन राशि का 50 प्रतिशत राज्य का शेयर दिया जाए।

-गंभीर रूप से बीमार एवं दुर्घटना के शिकार आशाओं को सरकार के पैनल अस्पतालों में इलाज की सुविधा दी जाए ।

-आशाओं को समुदायिक स्तरीय स्थाई कर्मचारी बनाया जाए। जब तक पक्का कर्मचारी नहीं बनाया जाता तब तक हरियाणा सरकार का न्यूनतम वेतन दिया जाए और इसे महंगाई भत्ते के साथ जोड़ा जाए। ईएसआइ एवं पीएफ की भी सुविधा दी जाए।

-आशा वर्कर्स को हेल्थ वर्कर का दर्जा दिया जाए।

-21 जुलाई 2018 को जारी किए गए नोटिफिकेशन के सभी बचे हुए निर्णय को लागू किया जाए।

Edited By: Jagran