जागरण संवाददाता, करनाल: मीनार रोड स्थित सीएमओ ऑफिस में बुढ़ापा पेंशन के लिए बुजुर्गो का मेडिकल परीक्षण कराया। इसके तहत करनाल खंड से करीब 100 लोगों की मेडिकल जांच की गई। विभाग की मानें तो सभी खंडों में बुजुर्गो के स्वास्थ्य जांच कर मेडिकल जांच कराई जा रही है कि आयु प्रमाणित होने पर बुढ़ापा पेंशन जारी की जा सके।

आयु प्रमाण-पत्र न होने के कारण मार्च से अब तक बुढ़ापा पेंशन के आवेदन लंबित थे। मार्च में कोरोना महामारी की घोषणा के बाद जिला समाज कल्याण अधिकारियों ने बुजुर्गो की मेडिकल जांच कराने से परहेज किया। अब दस माह बाद बुजुर्गों को पेंशन मिलने की राह आसान हुई है। डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी दुर्घटना सहायता योजना बंद

डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी दुर्घटना सहायता योजना को बंद होने से जिले के आवेदनकर्ताओं में असमंजस की स्थिति है। इस योजना के तहत दुर्घटनाग्रस्त होने पर जिला समाज कल्याण विभाग की ओर से पीड़ित परिवार को एक लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता दी जाती थी। जानकारी के अनुसार पिछले एक साल के दौरान जिले में लगभग 200 से अधिक आवेदन लंबित चल रहे हैं, जबकि सरकार के अचानक योजना बंद करने से आवेदनकर्ताओं को झटका लगा है। इस संबंध में जिला अधिकारी लगातार बजट की मांग कर रहे थे। पीड़ित सुदेश रानी ने बताया कि एक साल से कार्यालय में चक्कर काट रही हूं, लेकिन अभी तक एक लाख रुपये उसके खाते में नहीं आए हैं। अब कर्मचारी स्कीम बंद होने की बात कह रहे हैं।

इधर, जिला समाज कल्याण अधिकारी सत्यवान ढिलोड़ ने बताया कि काफी समय से लंबित बुजुर्गो की आयु प्रमाणित करने के लिए मेडिकल कराए हैं। जिले के सभी खंडों में 240 से अधिक आवेदन लंबित थे। आयु प्रमाणित होने पर पेंशन लाभ की राह आसान हो सकेगी। उन्होंने बताया कि डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी दुर्घटना सहायता योजना संबंधित आवेदनकर्ताओं के नाम की सूची मुख्यालय भेजी हुई है। योजना बंद होने की घोषणा पर अब खातों में राशि जारी करने के बारे में उच्चाधिकारियों को फैसला लेना है।

Edited By: Jagran