संवाद सहयोगी, इंद्री : कृषि एवं कल्याण विभाग द्वारा उप-कृषि निदेशक डा. आदित्य प्रताप डबास के निर्देशानुसार गांव गढ़ी जाटान व भादसों में मक्का खेत दिवस का आयोजन किया गया।

कृषि अधिकारी डा. रणबीर सिंह ने बताया कि धान की फसल की अपेक्षा मक्का की फसल में कम पानी का उपयोग करना पड़ता है और मक्का की फसल कम समय में तैयार हो जाती है। यदि किसान सही तकनीक एवं उन्नत बीच से अपने खेत में मक्का की बिजाई करें तो किसान एक एकड़ भूमि से 35 से 40 क्विटल मक्का की फसल ले सकते हैं। उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से मेरा पानी मेरी विरासत योजना के तहत मक्का की बिजाई करने पर सात हजार रुपये प्रति एकड़ की दर से अनुदान राशि भी प्रदान की जाती है। उन्होंने बताया कि धान की फसल की अपेक्षा मक्का की फसल में कम बीमारियां आती है और मक्का की बिजाई करने पर बहुत ही कम लागत आती है। इसलिए मक्का की फसल उगाने से किसान की आमदनी भी अच्छी हो जाती है।

अधिकारी सुनीता ने बताया कि फसल अवशेष जलाने से जमीन की उर्वरा शक्ति भी नष्ट होती है और भूमि में मौजूद सूक्ष्म लाभकारी जीव व मित्र कीटों का नुकसान होता है। उन्होंने किसानों आह्वान किया है कि किसान इन कृषि यंत्रों का उपयोग कर फसल अवशेषों का बेहतर प्रबंधन कर सकते हैं। फसल अवशेष का प्रबंधन कर न केवल चारे की कमी को पूरा किया जा सकता है बल्कि इससे भूमि की उपजाऊ शक्ति भी बढ़ेगी व पर्यावरण प्रदूषित होने से भी बचाया जा सकेगा। मक्का खेत दिवस पर कृषि अधिकारी डा. विजय कुमार ने किसानों को फसल विविधीकरण के बारे में नई कृषि तकनीकों की जानकारी दी और इसके साथ-साथ गेहूं व सरसों की उन्नत किस्मों के बारे भी किसानों को जानकारी दी।

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