जागरण संवाददाता, करनाल : प्रदेश में चुनाव निपटान के बाद 134-ए के तहत होने वाले दाखिलों में परेशानी को लेकर सरकार ने हस्ताक्षेप किया है लेकिन धरातल पर अभिभावकों की समस्याओं का निवारण नहीं हो रहा है। सरकार अगर गंभीर होती तो 134-ए की प्रक्रिया शुरू से ही सरल की जा सकती थी। सरकार और सरकारी तंत्र केवल अभिभावकों को परेशान कर रहा है। इसका उदाहरण शिक्षा विभाग का पोर्टल भी दे रहा है। पोर्टल के अनुसार जिले में 1 मई को 1475 बच्चों को स्कूल अलॉट किए गए थे, लेकिन अभी तक केवल 845 बच्चों के दाखिले बताए जा रहे हैं। सरकार की मंशा पारदर्शी होती तो अब तक पहले ड्रा के साथ-साथ दूसरे ड्रा के बच्चे भी अपने स्कूल में पढ़ाई जारी कर चुके होते और साख बचाने के लिए सरकार को तिथि बढ़ाने की जरूरत न पड़ती। ---बॉक्स---

गड़बड़ियों पर गंभीर नहीं अधिकारी

मौलिक शिक्षा निदेशालय का 8 मई को जारी पत्र अब डीइइओ की फाइलों में लगने तक सीमित हो चुका है। निजी स्कूल संचालकों की मनमर्जी के आगे गरीब बच्चों के अभिभावकों की कोई सुनवाई नहीं हो रही है। सीएम सिटी में अलॉटमेंट के 19 दिन बाद भी पहले ड्रा के 630 बच्चे दाखिले को धक्के खा रहे हैं। 134-ए के तहत होने वाली गड़बड़ियों पर प्रदेश सरकार ने शुरू से ही गंभीरता नहीं दिखाई है और सत्ताधारी आश्वासन के गुबारे उड़ाने से पीछे नहीं हट रहे हैं। इधर, डीइओ कार्यालय भी निजी स्कूल संचालकों को चेतावनी वाले पत्र लिखकर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर रहा है। ---बॉक्स-----

स्कूलों पर मेहरबान अधिकारी

134-ए के तहत दाखिला न देने वाले निजी स्कूल संचालकों पर कार्रवाई के लिए मौलिक शिक्षा निदेशालय 8 मई को पत्र जारी कर चुका है। जिला शिक्षा अधिकारी कान में तेल डाल कर बैठे हैं, जिन्हें कायाल्य में पहुंचे अभिभावकों की समस्याएं सुनने या समझने में नहीं हा रही हैं। निजी स्कूलों पर जिला शिक्षा अधिकारी की इस तरह की मेहरबाजी और अभिभावकों के साथ बेरुखी बच्चों के बेहतर शिक्षा के सपने को खत्म कर रही है। पत्र के अनुसार डीइइओ सीबीएसई स्कूल की एनओसी और एचबीएसई स्कूलों की मान्यता रद्द करने की मुख्यालय को सिफारिश कर सकते हैं। जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही के कारण फिल्हाल डेढ़ माह से बच्चे बिना स्कूल के घर बैठे हैं। ---बॉक्स---

अभिभावक हो रहे परेशान

प्रेम नगर निवासी राजेश ने बताया कि चार साल से बेटी को टेस्ट दिलवा रहे हैं, इस बार मौका मिला, लेकिन अभी तक स्कूल अलॉट नहीं किया गया है। बैंक कॉलोनी में रहने वाली पूजा ने बताया कि बेटी के दाखिले के लिए अभी तक डीइइओ या बीइओ कार्यालय के अधिकारी कोई जवाब नहीं दे रहे हैं। हरीश कुमार ने बताया कि बच्चे का दाखिला स्कूल में हो चुका था, अचानक से दस दिन बाद उसका दाखिला रद करके किसी अन्य छात्र को दे दिया गया। अब बच्चे को दोबारा दाखिले के लिए धक्के खाने को मजबूर हैं। सुनीता अपनी बेटी को कक्षा दूसरी में भर्ती करवाना चाहती हैं और अलॉटमेंट भी हो चुकी है लेकिन आगे स्कूल बंद होने के कारण बेटी को दाखिला नहीं मिला। विभाग को तीन बार शिकायत दी, लेकिन कोई हल नहीं निकला। ---बॉक्स----

सिस्टम का सितम

134-ए को लेकर विभाग का सिस्टम शुरू से लेकर अब तक अभिभावकों को स्पष्ट नहीं हो सका है। परीक्षा से लेकर शिक्षा विभाग के सिस्टम ने अभिभावकों को उलझा कर रखा है। अभिभावक अनोज दास ने बताया कि मजदूरी करता हूं और बेटे को अच्छे स्कूल में पढ़ाने की इच्छा है। पारदर्शिता वाले सिस्टम में अभी तक उलझे हुए हैं। स्कूलों के विकल्प को लेकर उलझन, स्कूलों की अलाटमेंट के पहले ड्रा को लेकर स्थिति स्पष्ट न होना और अब दूसरे ड्रा कब निकलेगा इसका अभी तक स्पष्ट नहीं है। अलॉटमेंट के ड्रा को लेकर अभिभावक 19, 23, 27 अप्रैल को कार्यालयों में परेशान रहे। दूसरे ड्रा के लिए अभिभावकों को 10, 17 के बाद अब 20 मई का आश्वासन मिला है। अभिभावक हंसराज ने बताया कि सरकार ने स्कीम शुरू तो कर दी, लेकिन तीन साल बाद भी सिस्टम नहीं बना पाई है, जिससे अभिभावकों को परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं। अगर कोई निजी स्कूल संचालक बच्चों का दाखिला ले भी रहा है तो अभिभावकों को अपने स्कूल के सिस्टम की पर्ची भी थमा रहा है। --बॉक्स----

दूसरे ड्रा में 1749 बच्चे इंतजार में

करनाल में क्वालीफाइ 3224 बच्चों में से 1475 का बुधवार को स्कूल अलॉट कर दिया गया है, जबकि 1749 बच्चे पहले, 10, 17 और अब 20 मई का इंतजार करने को मजबूर हैं। करनाल खंड में 3727 बच्चों की अलॉटमेंट, जबकि 3021 बच्चे वेटिग में हैं। अगर अभिभावकों की माने तो विभाग ने केवल 17 मई को लॉलीपॉप दिया है। 10 मई के बाद 17 मई को भी जब अलॉटमेंट नहीं हुई तो अधिकारियों ने शनिवार और रविवार की छुट्टी का कह सोमवार पर की तिथि अभिभावकों को बता दी। --वर्जन----

134-ए के दाखिले को लेकर सरकार ने एक सप्ताह का समय बढ़ा दिया है। बच्चों को निजी स्कूल संचालक दाखिला दे रहे हैं, इसलिए कार्रवाई का सवाल नहीं आ रहा है। वैसे सीबीएसई स्कूलों की एनओसी और एचबीएसई स्कूलों की मान्यता रद करने के लिए डीइइओ सिफारिश कर सकते हैं। जिले में दूसरे ड्रा की अलॉटमेंट में अधिकतर अभिभावकों की समस्याओं का निवारण हो जाएगा। निजी स्कूल संचालकों ने पोर्टल पर 845 बच्चों के दाखिले की सूचना दी है।

-राजपाल चौधरी, जिला शिक्षा अधिकारी, करनाल

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Posted By: Jagran

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