विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 14, 2015 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

पक्के पुल पर आषाढ़ वार्षिक मेला शुरू

By Edited By:
Published: Thu, 14 May 2015 11:05 PM (IST)

संवाद सहयोगी, घरौंडा : मधुबन में स्थित पक्के पुल से प्रसिद्व पीर बाबा हजरत इलाही की मजार पर ज्येष्

News Article Hero Image

संवाद सहयोगी, घरौंडा :

मधुबन में स्थित पक्के पुल से प्रसिद्व पीर बाबा हजरत इलाही की मजार पर ज्येष्ठ व आषाढ़ क ा वार्षिक मेला शुरू हो गया है। बृहस्पतिवार को लगने वाले मेले में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। हजारों श्रद्वालुओं ने पीर बाबा पर माथा टेक मनोकामनाएं मागी। पुलिस की व्यवस्था कम होने के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

श्रद्धालुओं का कहना है कि पक्के पुल के पास एक नहर निकली हुई है। नहर के पुल निर्माण में काफी परेशानी आ रही थी। एक रात ठेकेदार को स्वप्न दिखाई दिया और पुल में मोड़ देने के लिए कहा गया। पुल निर्माण कंपनी ने पुल की दिशा बदलकर पुल का निर्माण किया था। तभी से इस स्थान का नाम पक्का पुल रखा गया। पक्के पुल पर पाच मजार हैं। जिसमें मुख्य पीर बाबा हजरत इलाही, बहादूर खान दुरानी, मोहम्मद अली, के सर मल बोरी है। इनकी पूजा-अर्चना पूरे साल बृहस्पतिवार को की जाती है। लेकिन ज्येष्ठ व आषाढ़ माह में इनकी पूजा करने का विशेष महत्व है। मजारों पर माथा टेकने के लिए हरियाणा के साथ-साथ उत्तर प्रदेश, पंजाब, राजस्थान, दिल्ली, हिमाचल सहित अन्य कई राज्यों के लिए आते हैं।

पुलिस व्यवस्था कम होने से श्रद्धालुओं को परेशानी

ज्येष्ठ माह शुरू होते ही पक्के पुल पर श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़नी शुरू हो गई है। मेले के दूसरे बृहस्पतिवार को पीर बाबा पर पूजा करने वालों की लंबी लाईने लगी हुई थी। मेले में पुलिस की व्यवस्था कम होने के कारण लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पक्के पुल के सेवादार प्रेम सिंह ने बताया कि पीर बाबा हजरत इलाही व सभी मजारों की पूजा करने के लिए पूरे साल लोग पहुचे हैं। उन्होंने कहा कि ज्येष्ठ व आषाढ़ माह में मजारों की विशेष पूजा की जाती है।

पंजाब के निवासी कंवलजीत ¨सह ने बताया कि काफी वर्षो से पक्के पुल पर पूजा करने के लिए पहुचते हैं। उन्होंने कहा कि पीर बाबा सभी की मनोकामनाएं पूरी करते हैं। दिल्ली निवासी रमेश कुमार ने बताया कि बाबा पीर हजरत इलाही के सच्चे भगत हैं और ज्येष्ठ माह में यहा पर पूजा करने के लिए आते हैं।