जागरण संवाददाता, कैथल: मंडियों में गेहूं का उठान और पेमेंट की समस्या बनी हुई है। पेमेंट का भुगतान नहीं होने के कारण आढ़तियों को दिक्कत आ रही है। एक तरफ जहां आढ़तियों को सरकार की ओर से भुगतान नहीं हो रहा, वहीं उठान न होने के कारण खुले आसमान के नीचे गेहूं के लाखों कट्टे पड़े हुए हैं।

एजेंसी के अधिकारियों का कहना है कि इस बार लेबर की दिक्कत के चलते उठान कार्य काफी धीमा चल रहा है। इस सीजन खरीद का कार्य भी कोरोना महामारी के कारण देर हुआ था। अब उठान में भी काफी देरी हो रही है। पूरे जिले में 10 मंडियां हैं और 232 खरीद केंद्र हैं। 21 अप्रैल को खरीदी गई गेहूं की भी आज तक राशि आढ़तियों को नहीं मिली है। आढ़तियों ने भुगतान न होने पर सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा है कि वह ऐसा जानबूझकर कर रही है। सरकार की नीयत खराब हो चुकी है। जो राशि का भुगतान नहीं कर रही है।

मंडी आढ़ती एसोसिएशन के जिला प्रधान अश्वनी शोरेवाला ने बताया कि सरकार इस सीजन में आढ़तियों के साथ भद्दा मजाक किया गया है। पहले तो निजी बैंक में अलग खाता खुलवाने का नियम बनाया। इसके बाद जब सभी ने बैंक में अकाउंट खुलवा लिया तो पेमेंट नहीं दी जा रही है। इसको सरकार की नीति और नियत साफ नहीं हैं। यदि थोड़ी बहुत पेमेंट किसी आढ़ती को सरकार ने की भी है तो उसे अधिकारी किसानों को भी नहीं देने दे रहे है। जिससे आढ़ती के साथ किसान भी दुविधा में है। यदि सरकार का यही रवैया रहा तो आढ़तियों को प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

ऑनलाइन माध्यम से हो रही पेमेंट

एसडीएम कमलप्रीत कौर ने बताया कि आढ़तियों को पेमेंट देने की प्रक्रिया इस बार ऑनलाइन माध्यम से की जा रही है। जिस कारण कुछ समय लग रहा है। यह प्रक्रिया जारी है, जल्द ही भुगतान करवाया जाएगा।

अब तक हुई पांच लाख 69 हजार 914 मीट्रिक टन गेहूं की आवक

गेहूं खरीद सीजन के दौरान जिला की विभिन्न मंडियों तथा खरीद केंद्रों में अब तक पांच लाख 69 हजार 914 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद की गई है। गेहूं की फसल को सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य 1925 रुपये प्रति क्विटल की दर से खरीदा गया है। गेहूं की कुल खरीद में से खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने दो लाख 9 हजार 939 मीट्रिक टन, हैफेड ने 2 लाख 24 हजार 613 मीट्रिक टन, एफसीआई ने 73 हजार 730 मीट्रिक टन, हरियाणा वेयर हाउस ने 61 हजार 632 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद गई है। सरकार की ओर से गेहूं के अवशेषों को पहली बार जलाने पर 2500 रुपये, दो से पांच एकड़ तक 5000 रुपये और पांच से अधिक एकड़ पर 15 हजार रुपये तक जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

Posted By: Jagran

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