संवाद सहयोगी, पूंडरी:

श्री रघुनाथ मंदिर में श्री लक्ष्मी नारायण यज्ञ में आज यजमान के रूप में जोगिद्र ने परिवार सहित भगवान का पूजन किया एवं यज्ञ में आहुति डाली। आज तीसरे कुंड पर यज्ञमान प्रलाद ने सपत्नी उर्मिला देवी सहित भगवान का पूजन किया और आहुति डाली। यज्ञ का महत्व के बारे में आचार्य कृष्णाचार्य ने बताया कि यज्ञ मनोकामना की पूर्ति करता है और किसी कामना को लेकर के अगर यज्ञ किया जाए तो उसमें सफलता प्राप्त होती है। अनेकानेक राजाओं ने संतान आदि प्राप्ति के लिए यज्ञ किए हैं। कोई मुक्ति के लिए यज्ञ करता है कोई भौतिक पदार्थो के लिए यज्ञ करता है और कोई हरि प्राप्ति के लिए। कामना कुछ भी हो सकती है लेकिन यज्ञ करने से पहले यह निश्चित है कि हमें यज्ञ के नियमों का पालन करना चाहिए ब्रह्मचर्य से रहना चाहिए। सोच, दया, तप, व्रत नियम इन सब का पालन करना चाहिए झूठ नहीं बोलना चाहिए कोई पाप नहीं करना चाहिए। किसी के लिए बुरा नहीं सोचना चाहिए सबके लिए अच्छा सोचे तो इसमें इस प्रकार से अनेकों-नेक नियम है, जोकि हमें पालन करने चाहिए जितनी शुद्धता से, पवित्रता से यज्ञ किया जाता है उतना ही उसका फल जल्दी प्राप्त होता है। दुष्टों की संगत न करें शराब न पीए कोई नशा न करें यज्ञ के निमित भगवान श्री कृष्ण यज्ञ पति लक्ष्मी नारायण भगवान इन सब का या अपना कोई भी इष्ट हो उसका ध्यान करें उसका जाप करें और संयम से रहें तो यह यज्ञ के नियम है नियम से जो यज्ञ में पालना करता है। यज्ञ में आहुति देता है निसंदेह उसकी मनोकामना पूर्ण होती है। सोमवार को भी सैकड़ों श्रद्धालुओं ने यज्ञ में आहुति डाली।

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