जागरण संवाददाता, कैथल : आर्ट ऑफ लिविग की ओर से स्वामी शिवपाद के पावन सानिध्य में आयोजित किए जा रहे कठोपनिषद पाठ के दूसरे दिन का शुभारंभ अद्वैत स्वरूप आश्रम में आचार्या डॉ. सीमा भटनागर ने किया। आचार्या सोनिया मिगलानी ने बताया कि स्वामी शिवपाद ने कठोपनिषद ज्ञान का शुभारंभ तीन बार ओम के उच्चारण के साथ करते हुए न सिर्फ गुरु-शिष्य परंपरा पर जानकारी प्रदान की, अपितु उनके द्वारा मृत्यु के भिन्न-भिन्न आयामों से संबंध प्रदान किया गया। ज्ञान जीवन में ज्ञान के नवीन प्रकाश का सूर्योदय करने वाला रहा। उन्होंने बताया कि शिष्य के लिए ज्ञान ही सर्वोत्तम है और आध्यात्मिक उन्नति के लिए किसी भी साधक शिष्य की सबसे बड़ी परीक्षा उसके धैर्य की परीक्षा होती है। मृत्यु के बारे में चर्चा जारी रखते हुए उन्होंने कहा कि मृत्यु के बाद भी मन रह जाता है, इसलिए हमें शरीर छोड़ने से पहले सब छोड़ना सीखना होगा, यही मुक्ति है। उन्होंने मृत्यु को परमानंद का द्वार बताते हुए कहा कि मृत्यु न सिर्फ मुक्तिदायक है, अपितु मृत्यु से सम्बद्ध विशुद्ध ज्ञान जीवन को जीवंत भी बनाता है। इंद्रीय और मन के बीच द्वंद की शुरुआत ही दुख का मूल है। यदि इंद्रियां ग्रहण करने में असमर्थ हैं, लेकिन फिर भी मन में कोई इच्छा बाकी है तो वो इच्छा ही दुख का मूल कारण बनती है। कार्यक्रम के अंतिम चरण में उन्होंने बताया कि जो साधक अपने मन की गति एवं प्रवृत्ति को समझ पाते हैं, वहीं स्थिरप्रज्ञ हैं। समाजोपयोगी सार्थक एवं सफल जीवन जीने के लिए मूलमंत्र के रूप में उन्होंने आत्मानुशासन को जीवन का अत्यावश्यक अंग बताया। कार्यक्रम में स्वामी रविद्र ठाकुर, दीपक सेठ एडवोकेट, अल्पना मित्तल, डॉ. विकास भटनागर, भारत खुराना, कंचन सेठ, अमर ठाकुर, हर्षिता मिगलानी, सुनील खुराना मौजूद रहे।

Posted By: Jagran

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस