सोनू थुआ, कैथल

रोडवेज डिपो के बेड़े से हर महीने बसों की संख्या घटती जा रही है। पिछले पांच साल में कैथल डिपो को 14 रोडवेज की बसें मिली हैं, लेकिन कंडम 55 पहले हो चुकी हैं और 16 बसें इस वर्ष भी जून माह के अंत तक डिपो से बाहर हो जाएंगी। जो अपने दस किलोमीटर की आयु सीमा पूरा कर लेंगी। छह साल में 71 बसें कंडम होंगी। डिपो के पास 200 बसों की स्वीकृति है, लेकिन डिपो के बेड़े में 85 बसें ही रह जाएगी। वहीं पांच मिनी बसों को सिविल अस्पताल में एंबुलेंस के लिए प्रयोग किया जा रहा है। पहले से ही परेशानी झेल रहे डिपो को और अब ज्यादा समस्या बढ़ने वाली है। समय पर बस नहीं मिलने से घंटों यात्रियों को बसों का इंतजार करना पड़ेगा। पिछली दो साल में डिपो को डिमांड के बाद भी रोडवेज की बसें नहीं मिली है नई बस की आयु सीमा 10 वर्ष

नई रोडवेज बस जब बेड़े में शामिल होती है तो उसकी आयु सीमा व किलोमीटर तय होते हैं। नई बस की आयु सीमा अब दस वर्ष होती है। इनको दस वर्ष तक रूटों पर दौड़ाया जाता है और आठ लाख किलोमीटर तय करने होते हैं। जब बसों की आयु और किलोमीटर पूरे हो जाते हैं तो कुछ अच्छी बसों के किलोमीटर बढ़वा लिए जाते है। दस वर्ष के बाद बसों को कंडम घोषित कर दिया जाता है। इसके बाद इन बसों को रूटों पर नहीं लाया जा सकता। यूं घटती गईं बसें

-2015 में रोडवेज डिपो के पास 156 बसें थी

-2016 में 13 बसें कंडम हुई, 143 बसें बची।

-2017 चार कंडम, 139 रही।

-2018 में 10 कंडम बसें, 129 रही।

-2019 में 12 बसें कंडम, 117 रही।

-2020 में 16 बसे कंडम, 101 रही।

- 2021 में जून 16 महीने तक बसें कंडम हो जाएगी। 2016 से अब तक 14 नई बसें मिली

वर्ष 2016 से अब तक कैथल डिपो को 14 नई बसें दी गई हैं। वहीं डिपो में प्राइवेट बसों की संख्या जून के बाद ज्यादा हो जाएगी। जिले में 96 प्राइवेट बसें चल रही हैं। रोडवेज की इन बसों में से भी 10 बसों की स्थिति बहुत ही दयनीय है। जो रोजाना रूट पर खराब हो रही है। रोडवेज विभाग ने कई बार निदेशालय को पत्र लिखकर नई बसें भिजवाने के लिए अवगत भी कराया था। बावजूद इसके बेड़े में नई बसें शामिल नहीं हो पाई है। बसों की कमी डिपो में हो रही है। उच्च अधिकारियों को अवगत करवाया जा चुका है। ताकि डिपो को बसें मिले। 2016 से जून महीने तक 71 बसें कंडम हो जाएंगी। डिपो को सिर्फ 14 नई बसें ही मिली हैं। मिनी बसें सिविल अस्पताल में एंबुलेंस के लिए प्रयोग की जा रही है।

अजय गर्ग, जीएम रोडवेज कैथल

Edited By: Jagran