कमल बहल, कैथल : मूंदड़ी गांव में बनने वाले प्रदेश के पहले महर्षि संस्कृत वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय को आखिरकार गुरुजी मिल ही गए हैं। विश्वविद्यालय ने कक्षाएं तो कुछ दिन पहले शुरू कर दी थी, लेकिन कक्षाओं में प्रोफेसरों की नियुक्ति नहीं हो पाई थी। अब 13 अगस्त को आयोजित किए गए साक्षात्कार के बाद मंगलवार को विश्वविद्यालय को चार सहायक प्रोफेसर मिले हैं जो विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों संस्कृत का ज्ञान दे उन्हें पढ़ाएंगे। प्रोफेसरों के न मिलने के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही थी। अब सहायक प्रोफेसरों की नियुक्ति होने के बाद विद्यार्थियों की नियमित रूप से पढ़ाई हो पाएंगी।

विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों की यह है स्थिति :

विश्वविद्यालय में शुरूआती दौर में आचार्य व शास्त्री के लिए 100 सीटें निर्धारित की गई है। जबकि डिप्लोमा कोर्स के लिए सीटें निर्धारित नहीं हुई है। इसमें विद्यार्थियों की संख्या के अनुसार दाखिले किए जा रहे हैं। अब तक डिग्री कोर्सों में 80 दाखिले हो चुके है। जिसमें आचार्य के 38, शास्त्री के लिए 42 दाखिले हुए हैं। वहीं डिप्लोमा कोर्स में 20 दाखिले हो चुके हैं। इस विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए चार सहायक प्रोफेसर नियुक्त कर दिए गए हैं। विश्वविद्यालय की ओर से 23 अगस्त तक दाखिले की तिथि को बढ़ाया गया है।

सभी विषयों के आए शिक्षक :

विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. श्रेयांश द्विवेदी ने बताया कि विद्यार्थियों को संस्कृत विषय पढ़ाने के लिए विषयों के अनुसार सभी विषयों के प्रोफेसर नियुक्त किए गए हैं। उन्होंने बताया कि व्याकरण, साहित्य, दर्शन और ज्योतिष विषयों के चार सहायक प्रोफेसर नियुक्त कर लिए गए हैं। वर्तमान में संस्कृत के विद्यार्थियों की कक्षाएं डॉ. भीम राव आंबेडकर कॉलेज में लगाई जा रही हैं। विश्वविद्यालय को रजिस्टार भी मिल चुके हैं।

Posted By: Jagran

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