कमल बहल, कैथल

संस्कृत विश्वविद्यालय का भवन मूंदड़ी गांव में बनना है। अभी उसका निर्माण कार्य चल रहा है। इस साल से इसका सत्र शुरू हो चुका है। फिलहाल कक्षाएं डॉ. भीमराव आंबेडकर राजकीय कॉलेज में लग रही हैं। ये कक्षाएं 5 अगस्त से बाबा लदाना गांव स्थित धार्मिक डेरा बाबा राजपुरी में शुरू होने थी, लेकिन अभी तक नहीं लग पाई हैं। यह भी सामने आ रहा है कि डेरे में कक्षाएं शुरू करने को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन में खींचतान चल रही है। एक पक्ष चाहता है कि कॉलेज में ही कक्षाएं लगे, जबकि दूसरा पक्ष डेरे में कक्षाएं लगाना चाहता है। इस कारण खींचतान के चलते डेरे में कक्षाएं नहीं लगाई जा रही हैं। इसका असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पढ़ रहा है।

ये बताए जा रहे हैं डेरे में कक्षाएं शुरू न कर पाने के कारण

बाबा लदाना की दूरी शहर से करीब 15 किलोमीटर दूर है। इस कारण आने-जाने में विद्यार्थियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। दूसरा कारण डेरे में पिछले साल गद्दी को लेकर दो पक्षों में लंबा विवाद चला था। प्रशासन ने इसे अपने अधीन ले लिया था। बाद में कोर्ट में केस जाने के बाद प्रशासन ने महंत दूजपुरी को कब्जा दिलवाया था। इस विवाद को देखते हुए यहां कक्षाएं लगाने में हो रही देरी का कारण माना जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार यहां पर दो बड़े अधिकारियों में कक्षाएं लगाने के स्थान पर असहमति है। उससे अभी तक कक्षाओं का स्थान निर्धारित नहीं हो सका है। एक अधिकारी डेरे में कक्षाएं लगाने के लिए तैयार है, तो दूसरा इसके पक्ष में बिलकुल भी नहीं है।

अब तक डेरे में कक्षाएं लगाने को लेकर केवल विद्यार्थियों के रहने की ही व्यवस्था हो पाई है, लेकिन विद्यार्थियों ने आवास नहीं किया है। केवल स्टाफ सदस्य ही हॉस्टल में रहने लगे हैं।

पर्याप्त व्यवस्था नहीं : द्विवेदी

वीसी डॉ. श्रेयांश द्विवेदी ने बताया कि डेरा राजपुरी में कक्षाएं न लगने का कारण डेरे में पूरी व्यवस्थाएं न होना रही है। अभी तक यहां पर केवल विद्यार्थियों के रहने की ही व्यवस्था की गई है। अभी विद्यार्थियों की रुचि डेरा में पढ़ने की नहीं हुई है। इस कारण जगदीशपुरा के राजकीय कॉलेज में ही कक्षाएं लगाई जा रही हैं। 31 अगस्त तक दाखिले की तिथि बढ़ा दी गई है, कुल 125 दाखिले अब तक हो चुके हैं।

Posted By: Jagran

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