हाथी, घोड़े, बतख और मछली... दीपावली पर अनोखे अंदाज में बनते हैं चीनी के ये खिलौने, पढ़ें कैसे होते हैं तैयार
कैथल के खील और चीनी के खिलौने दीपावली पर देशभर में मिठास घोलते हैं, जिनकी 50 साल पुरानी परंपरा है।

चीनी से बने खिलौने तैयार करते हलवाई। जागरण
HighLights
कैथल के खील-खिलौने देशभर में दीपावली की पहचान।
50 साल पुरानी परंपरा, तीन पीढ़ियों से बन रहे खिलौने।
मां लक्ष्मी पूजा में समृद्धि के प्रतीक, विशेष धान से खील।
सुरेंद्र सैनी, कैथल। दीपावली पर कैथल के धान की खील और चीनी के खिलौने देशभर के पर्व में मिठास घोलते हैं। खिलौनों में बतख, मछली, हाथी, घोड़े, ऊंट, मीनार आदि से बाजार में सज गए हैं।यहां खील-खिलौने तैयार करने का काम 30 से ज्यादा हलवाई कर रहे हैं।
रेलवे रोड स्थित मार्केट में मांगेराम हलवाई की दुकान पर खील-खिलौने का कारोबार करीब 50 सालों से हो रहा है। मांगेराम हलवाई ने इस कार्य की शुरूआत की थी, अब उनके बेटे सुरेश बंसल इसे संभाल रहा है। तीन पीढ़ियों से तैयार की जा रही खील-खिलौने की इस मिठाई की मांग प्रदेश ही नहीं दूसरे राज्यों तक है।
ऐसे तैयार किए जाते हैं खिलौने
हलवाई राजाराम ने बताया कि पहले चीनी का घोल तैयार किया जाता है। चासनी को लकड़ी के सांचे में डाली जाती है, जिससे खिलौने तैयार हो जाते हैं। खील बौने धान से तैयार की जाती है, इस धान की किस्म भी अलग होती है, यह केवल खील तैयार करने के काम आती है।
मां लक्ष्मी की पूजा में खील-खिलौनों का महत्व
हिंदू धर्म में दीपावली की रात मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है। खील-खिलौने भी अर्पित किए जाते हैं। खील खुशहाली के प्रतीक माने जाते हैं। इन्हें अर्पित करके परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।
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