जेएनएन, जींद। यहां एक कंपनी के नाम पर लोग बड़ी ठगी का शिकार हो गए। कुछ लोगों ने सीटीएम माइक्रो फाइनेंस कंपनी के नाम पर सस्ती दर पर महिला समूहों को लोन दिलाने के नाम पर करीब 1325 लोगों से 50 लाख रुपये ठग लिए। कंपनी चलाने वालों ने लोन लेने की इच्छुक महिलाओं को तलाशने के लिए वेतन पर 450 युवकों को नौकरी पर रखा हुआ था।

शिकायकर्ता सुरेश रेढू, मंदीप, ममता, धर्मेंद्र, सुशील, प्रदीप, जगदीश, नरेश, राजपाल ने बताया कि मार्केटिंग करने वाले युवकों को बकायदा भारत सरकार का आइकार्ड दिया हुआ था। इससे लोग उन पर जल्दी विश्वास कर लेते थे। कंपनी के कर्मचारी लोगों से एक लाख रुपये के लोन के बदले में 3775 रुपये फाइल चार्ज और इंश्योरेंस के नाम पर लेते थे।

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उन्‍होंने बताया कि कागजी कार्यवाही के बाद 90 दिन में लोन पास करने का आश्वासन दिया जाता था। कंपनी पूरे नौ माह तक लोगों को इसी तरह झांसे में लेकर पैसे ऐंठती रही। इसके बाद नरवाना की कुछ महिलाओं का एक लाख रुपये का लोन जारी कर दिया। इसके बाद उनको सबूत के तौर पर प्रयोग करते हुए लोगों के बीच में जाकर फिर से पैसे ऐंठने का कार्य शुरू कर दिया। जब अधिकतर को लोन के पैसे देने का समय आया तो आरोपित ने कार्यालय बंद कर दिया।

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चार लोगों के समूह को देते थे लोन

शिकायकर्ताओं ने बताया कि आरोपितों ने लोन देने के लिए नियम बनाए हुए थे और ग्रुप में ही लोन देते थे। इसके लिए चार लोगों को शामिल किया जाता था। प्रत्येक की एक-एक लाख रुपये की राशि का लोन जारी करने की एवज में 3775 के हिसाब से कुल 15100 रुपये फाइल चार्ज व इंश्योरेंस के लेते थे।

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बदलते रहे कंपनी का नाम

शिकायकर्ताओं ने बताया कि शुरुआत में कंपनी गांव बिघाना निवासी सुनील व उसके एक साथी ने खोली थी। इसके थोड़े दिनों के बाद कंपनी का चार्ज रोहतक निवासी महेंद्र सिंह ने ले लिया। इन लोगों ने नौ माह के अंदर तीन बार कंपनी के नाम बदले। पहले कंपनी का नाम सीटीएस माइक्रो फाइनेंस कंपनी था, उसके बाद यम्बो बिजनेंस प्राइवेट लिमिटेड और उसके बाद बालाजी फाउंडेशन प्राइवेट लिमिटेड रखा गया।

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कंपनी में काम करने वाले युवाओं से मांग रहे पैसे

फाइनेंस कंपनी के कार्यालय बंद करने के बाद उसमें नौकरी करने वाले युवाओं की मुसीबत बढ़ गई है। जिन लोगों ने कंपनी में लोन के लिए अप्लाई किया था, वह लोग अब कंपनी कर्मचारियों से पैसे मांग रहे है। कंपनी में नौकरी करने वाले युवाओं ने बताया कि उनको 14,800 रुपये सैलरी व बाइक का पेट्रोल अलग से देने का वायदा किया था, लेकिन कंपनी ने उनकी सैलरी भी नहीं दी।

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कंपनी के सभी कार्यालयों पर लगा ताला

शिकायकर्ताओं ने बताया कि कंपनी ने जींद मुख्यालय की बजाए कस्बों में ही कार्यालय खोले। आरोपितों ने जुलाना, पिल्लूखेड़ा, नरवाना में अपने कार्यालय बनाए हुए थे। इसके अलावा हिसार, फतेहाबाद, कैथल जिले में भी अपने कार्यालय बनाए हुए हैं।

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'' लोन देने के नाम पर लोगों से पैसे लेने का मामला उनके संज्ञान में आया है। कुछ लोग उनसे मिले थे और उसके जांच के आदेश दे दिए है।

                                                                                                     - डॉ. अरूण सिंह, एसएसपी, जींद।

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Posted By: Sunil Kumar Jha