जागरण संवाददाता, जींद: किसान आंदोलन की जीत और किसानों के अन्य लंबित मुद्दों को लेकर किसान सभा हरियाणा की राज्य स्तरीय कन्वेंशन शनिवार को अर्बन एस्टेट स्थित जाट धर्मशाला में हुई। कन्वेंशन में किसानों की समस्याओं पर संघर्ष तेज करने का आह्वान करते हुए आगामी आंदोलन की घोषणा की गई। राज्य प्रधान फूल सिंह श्योकंद की की अध्यक्षता में हुई कन्वेंशन में किसान सभा ने सर्वसम्मति से दो प्रस्ताव पारित किए।

श्योकंद ने कहा कि पहले प्रस्ताव में संयुक्त किसान मोर्चा हरियाणा के आहवान पर आंगनबाड़ी कर्मचारियों की हड़ताल का समर्थन करते हुए 10 जनवरी को एकजुटता कार्यवाही करने और दूसरा किसान आंदोलन के दौरान बनाये गए सभी मुकदमे वापस लेने व बर्खास्त कर्मचारियों व शिक्षकों को बहाल करते हुए शहीद परिवारों को जल्द मुआवजा देने की मांग का प्रस्ताव पारित किया गया। किसान सभा के राज्य कार्यकारी महासचिव सुमित सिंह ने कहा आगामी कार्यक्रमों की घोषणा करते हुए बताया कि 19 जनवरी को किसान मजदूर एकता दिवस मनाते हुए सभी जिलों में कन्वेंशन व प्रदर्शन किए जाएंगे। 23-24 फरवरी को केंद्रीय ट्रेड यूनियन की राष्ट्रीय हड़ताल का समर्थन करते हुए हिस्सेदारी की जाएगी व हड़ताल को कामयाब बनाएंगे। स्थानीय मुद्दों को लेकर 23 से 31 जनवरी तक तहसील स्तर पर धरने दिए जाएंगे। प्रदेश भर में सदस्यता अभियान चलाया जाएगा। कन्वेंशन को संबोधित करते हुए किसान सभा के राष्ट्रीय वित सचिव कृष्ण प्रसाद ने कहा कि कृषि कानून रद करवाने की पहली लड़ाई को किसान जीत चुके हैं। एमएसपी और खरीद की गारंटी के सवाल, किसानों की कर्जा मुक्ति व अन्य मुद्दों पर किसान मोर्चा अगले आंदोलन के लिए काम करेगा। मोदी सरकार जिस रास्ते पर कदम बढ़ा रही है, वो कृषि अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर कॉरपोरेट घरानों के फायदे बढ़ाने की नीति है।

इंदरजीत सिंह ने कहा कि पिछले दिनों बारिश व गुलाबी सुंडी से कपास, धान व अन्य फसलों को भारी नुकसान पहुंचा था, जिसकी सही गिरदावरी करवाने की बजाय सरकार खाना पूर्ति कर रही है। फसल खरीद पर दर्जनों शर्तें लगा रखी है। बीमा कंपनियों की मनमानी के चलते किसानों को लूटा जा रहा है। बुढ़ापा पेंशन को काटने के लिये आय की सीमा लगा दी। आवारा पशुओं की समस्या पर रोक लगाई जाए। इन सभी जन मुद्दों को लेकर किसान सभा गांव-गांव में अभियान चलाएगी व सदस्यता करते हुए संगठन को मजबूत किया जाएगा। कन्वेंशन में सरकार द्वारा पिछले साल बनाये गए भूमि अधिग्रहण कानून व संपति क्षति वसूली विधेयक का भी विरोध किया गया।

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