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गर्मी ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है और गेहूं की फसल भी लगभग पक कर तैयार है। इस सीजन में आगजनी की सबसे ज्यादा घटनाएं होती हैं। ज्यादातर घटनाएं लापरवाही की वजह से होती हैं। खेतों से गुजर रहे बिजली के तारों और खेत में लगे ट्रांसफार्मर से निकली चिगारी भी इसका कारण बनती है। बिजली निगम ने फसली सीजन को देखते हुए हिदायत दी है, जिससे आग लगने की घटनाओं को रोका जा सकता है। बिजली निगम के एसई श्यामबीर सैनी ने बताया कि फसलें पक चुकी हैं, जिन्हें ध्यान में रखते हुए सोमवार को गांवों में दिन के समय सप्लाई बंद की जाएगी, ताकि कोई अनहोनी न हो। शाम छह से सुबह आठ बजे तक लगातार 14 घंटे बिजली सप्लाई चलेगी। सुबह आठ से शाम छह बजे तक गांवों में बिजली बंद रहेगी। फसली सीजन में किसान भी ध्यान रखें। जिस खेत से बिजली की लाइन गुजर रही है, अगर वह तार ढीले हैं या ट्रांसफार्मर का स्विच स्पार्किग कर रहा है, तो अपने एरिया के लाइनमैन से संपर्क कर ठीक कराएं। एसई श्यामबीर सैनी ने दैनिक जागरण संवाददाता बिजेंद्र मलिक के साथ बातचीत की। उसमें उन्होंने इस सीजन में बनाए गए बिजली आपूर्ति के शेड्यूल और किसानों के लिए जारी हिदायतों के बारे में बताया। उनके साथ हुई बातचीत के कुछ अंश इस प्रकार हैं :

खेतों में ट्रांसफार्मर हैं, उनसे भी स्पार्किंग की वजह से आग लग सकती है।

फसली सीजन में सिचाई का कार्य ज्यादातर बंद ही रहता है। इसलिए संभव हो सके, तो किसान अपने ट्रांसफार्मर का हैंडल काट कर रखें। ट्यूबवेल के पानी के टैंक को पूरा भर कर रखें, ताकि जरूरत पड़ने पर वो पानी आग बुझाने के काम आ सके।

कई जगह घरेलू बिजली लाइन गुजरती हैं और ट्रांसफार्मर खेतों में रखे हुए हैं?

वहां ट्रांसफार्मर के एच-पोल के आसपास घास-फूस या फसल की करके जमीन को साफ रखें। अगर कंबाइन से गेहूं कटवा रहे हैं और खेत के ऊपर से बिजली की लाइन गुजरती है, तो एरिया के लाइनमैन से संपर्क कर बिजली बंद कराएं। दिन में सप्लाई बंद होने से पशुओं के लिए पानी व चारे की व्यवस्था में दिक्कत आएगी?

आगजनी की घटनाओं को रोकने के लिए दिन के समय सप्लाई बंद करना जरूरी है। शाम छह से सुबह सात-आठ बजे तक सप्लाई दी जाएगी। इस दौरान किसान पशुओं के पानी व चारे से संबंधित का निपटाएं। ये व्यवस्था केवल फसली सीजन खत्म होने तक के लिए है।

इस दौरान खेतों में ट्यूबवेल के लिए दी जाने वाली सप्लाई का क्या शेड्यूल रहेगा?

वैसे इस समय सिचाई की ज्यादा जरूरत नहीं है। फिर भी दो ग्रुपों में रात के समय चार-चार घंटे सप्लाई दी जाएगी। जिससे ढाणियों में रहने वाले लोग पीने के पानी व पशुओं के लिए पानी व चारे की व्यवस्था कर सकें।

Posted By: Jagran

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