जागरण संवाददाता, जींद

राहगीरी कार्यक्रम जिला प्रशासन के लिए जी का जंजाल बनता जा रहा है। शहर में राहगीरी के आयोजन के लिए कोई जगह नहीं है। इस कारण प्रशासन को हर बार सड़क पर राहगीरी करवानी पड़ रही है। अब तक इसे छुट्टी के दिन करवाया जाता था, लेकिन गुरुवार को वर्किंग-डे के दिन गोहाना रोड पर राहगीरी के चलते सड़क को वन-वे कर दिया गया, जिससे जाम के हालात बन गए। करीब डेढ़ घंटे तक वाहन रेंग कर चलते रहे।

प्रदेश सरकार ने महीने के पहले और तीसरे रविवार को राहगीरी का दिन निर्धारित किया हुआ है। जींद में पिछली बार 7 अक्टूबर को राहगीरी हुई थी, जिसमें रस्साकसी के दौरान रस्सा टूटने से जिला खेल अधिकारी विनोद बाला घायल हो गई थीं। इसके बाद 21 अक्टूबर को राहगीरी होनी थी, लेकिन उस दिन सीएम की जनसहयोग रैली होने के कारण उसे स्थगित कर दिया था। इसके बाद 4 नवंबर को दीवाली के कारण और 18 नवंबर को भी राहगीरी नहीं हो पाई थी। ऐसे में नवंबर का महीना खाली न निकल जाए, प्रशासन ने बुधवार को आनन-फानन में मी¨टग बुलाई और वीरवार को ही महिला कॉलेज के गेट के सामने राहगीरी करने का निर्णय लिया। महिला कॉलेज के गेट के सामने आधी सड़क पर राहगीरी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कारण सड़क को चक्की मोड़ से कॉलेज ग्राउंड के सामने तक सड़क को वन-वे कर दिया गया। इससे सड़क पर जाम की स्थिति बन गई। वर्किंग-डे होने के कारण सुबह स्कूल की बसों व आटो और दफ्तरों में जाने वाले लोगों के वाहनों की भीड़ ज्यादा थी। करीब 9 बजे राहगीरी खत्म हुई, तब तक करीब डेढ़ घंटा वाहन रेंगकर चलते रहे।

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--आईटीआई, ट्रेनी ड्राइवरों, छात्राओं से जुटाई भीड़

गुरुवार को वर्किंग-डे होने और पहले से सूचना न होने के कारण राहगीरी में शहर का कोई व्यक्ति नहीं पहुंचा। पहले रविवार को राहगीरी होने के कारण स्कूली बच्चों को बुला लिया जाता था। लेकिन अब बच्चों के पेपर चल रहे हैं, जिस कारण वर्किंग-डे पर किसी भी सरकारी व प्राइवेट स्कूल ने बच्चे नहीं भेजे। इस कारण प्रशासन ने रोडवेज में ड्राइवर की ट्रे¨नग लेने वाले युवकों, आईटीआई के विद्यार्थियों और कौशल विकास केंद्र की लड़कियों को बुलाकर भीड़ जुटाने का प्रयास किया गया।

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--सरकार नहीं दे रही ग्रांट

राहगीरी के लिए सरकार ग्रांट नहीं दे रही है। इस कारण भी प्रशासन राहगीरी को बड़े स्तर पर नहीं कर पा रहा है। बिना पैसे के सभी काम करके एक तरह से खानापूर्ति करने का प्रयास किया जा रहा है। हर बार राहगीरी का एक बैनर लगा दिया जाता है। मंच के लिए मेज की जिम्मेदारी आरटीए सचिव को सौंप रखी है। लोक संपर्क विभाग माइक लगाता है और उसी के कलाकार अपनी प्रस्तुतियां दे देते हैं। कुछेक शहर के कलाकारों को फ्री में बुला लिया जाता है। करीब दो-तीन महीने पहले मुख्यमंत्री भी रानी तालाब के पास राहगीरी में शामिल हुए थे। उस समय का टेंट का बिल अभी तक पास नहीं हुआ है। गुरुवार को योगाचार्य सूर्यदेव आर्य ने कुछ देर योगासन कराए। कुछ कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति दी और अधिकारियों के संबोधन के बाद कार्यक्रम समाप्त कर दिया गया।

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एडीसी व एसडीएम ने की शिरकत

राहगिरी कार्यक्रम में एडीसी डा. मुनीष नागपाल, एसडीएम वीरेन्द्र सहरावत, नगराधीश सत्यवान ¨सह मान, डीएसपी रामभज, जिला रेडक्रास सोसायटी के सचिव राजकपूर सूरा, जिला खेल अधिकारी विनोद बाला, नेहरू युवा केन्द्र के जिला समन्वयक प्रदीप कुमार, समाजसेवी सुभाष ढिगाना समेत जिला प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारी तथा सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। एडीसी ने कहा कि जीवन को तनावमुक्त बनाने में राहगिरी कार्यक्रम अहम भूमिका निभा रहे हैं। एसडीएम वीरेन्द्र सहरावत ने कहा कि राहगिरी कार्यक्रम ऐसा मंच भी बन गया है, जहां आम व्यक्ति एवं कलाकार सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति देकर सुविख्यात हो रहे हैं। रेडक्रास सोसायटी के सचिव राजकपूर सूरा ने आदमी हूं आदमी से प्यार करता हूं, बस यहीं अपराध हर बार करता हूं गीत गाया। महिला एवं बाल विकास विभाग में सुपरवाईजर के पद पर कार्यरत सुशीला ने गीतों की प्रस्तुति दी। सेवानिवृत्त जेई महावीर ¨सह ने पशु पक्षियों की हू-ब-हू आवाज निकाल कर दर्शकों को खूब गुदगुदाया।

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