नगर परिषद प्रधान पति और ईओ के बीच विवाद के बाद से चल रही है खींचतान

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जागरण संवाददाता, जींद : नगर परिषद में चल रही खींचतान से लाखों रुपये के बिल अटक गए हैं। बंदर पकड़ने वाले की पेमेंट नहीं हो पा रही। वहीं नगर परिषद की गाड़ियों का तेल और मेंटेनेंस चार्ज के बिल भी फंसे हुए हैं। निर्माण कार्यों और स्ट्रीट लाइटों की मेंटेनेंस करने वाले ठेकेदारों के भी लाखों रुपये के बिल रुके हुए हैं। जिन्हें पास कराने के लिए ठेकेदार नगर परिषद अधिकारियों के यहां चक्कर काट रहे हैं। मंजूरी के लिए बिलों पर ईओ और प्रधान दोनों के हस्ताक्षर होने जरूरी हैं। ईओ के तो हस्ताक्षर हो चुके हैं, लेकिन प्रधान के हस्ताक्षर नहीं हुए। प्रधान पूनम सैनी बिलों पर हस्ताक्षर करने से मना कर रही हैं। उनका कहना है कि कई बिल संदेह के घेरे में हैं। जिनकी उनके पास लिखित में भी शिकायत आई हुई है। ईओ की गाड़ी प्रतिदिन 50 से 60 किलोमीटर शहर में चलने का रिकार्ड लॉन्ग बुक में दर्ज किया गया है। जोकि संभव नहीं है। अकाउंटेंट प्रदीप जैन ने बताया कि बिलों को प्रधान के हस्ताक्षर होने बाकी हैं। हस्ताक्षर कराने के लिए उनके घर गया था। लेकिन प्रधान ने बिलों पर हस्ताक्षर करने से इंकार कर दिया। पेमेंट जारी करने के लिए प्रधान व ईओ के हस्ताक्षर जरूरी हैं। प्रभावित हो रही व्यवस्था

बिलों पर हस्ताक्षर ना होने से नगर परिषद में रूटिन की व्यवस्था प्रभावित हो रही है। 17 जुलाई को किसी फाइल पर हस्ताक्षर करने को लेकर प्रधान पूनम सैनी के पति बीजेपी नेता जवाहर सैनी और पार्षद काला सैनी का ईओ डा. एसके चौहान के साथ विवाद हुआ था। उसके बाद से ही नगर परिषद में खींचतान चल रही है। काफी समय से प्रधान कार्यालय में भी नहीं आ रही। अब 6 को होगी कोर्ट में सुनवाई

विवाद के बाद ईओ का ट्रांसफर चार अगस्त को जींद से टोहाना हो गया था। ईओ ने ट्रांसफर के खिलाफ हाइकोर्ट में याचिका लगाई थी। कोर्ट ने उनके ट्रांसफर पर रोक लगाई हुई है। सोमवार को हाइकोर्ट में इस मामले में सुनवाई थी। अब छह नवंबर को अगली सुनवाई होगी। ईओ ने प्रधान द्वारा जारी रिलीव ऑर्डर पर सवाल उठाए थे। इस मामले में प्रधान और एसीएस से कोर्ट ने शपथ पत्र मांगा हुआ है। ये बिल अटके हुए हैं

कोरोना से मरने वाले मरीजों का अंतिम संस्कार कोविड नियमों के तहत नगर परिषद कर्मचारी करते हैं। इसकी एवज में कर्मचारी को दो हजार रुपये मिलते हैं। अंतिम संस्कार करने वाले कर्मचारियों को 80 हजार रुपये नगर परिषद को देने हैं। 1.22 लाख रुपये बंदर पकड़ने का बिल

नगर परिषद ने शहर में बंदरों को पकड़ने का ठेका दिया हुआ है। बंदर पकड़ने वाले ठेकेदार को 1.2 लाख रुपये की राशि जारी करनी है। इसकी फाइल पर भी प्रधान के हस्ताक्षर होने बाकी हैं। पेट्रोल पंप का 24 हजार रुपये बकाया

नगर परिषद की गाड़ियों के लिए मोहित पेट्रोल स्टेशन से 24 हजार रुपये का तेल खरीदा गया है। प्रधान के हस्ताक्षर नहीं होने इस पेमेंट का भुगतान नहीं हो रहा। वहीं एक गाड़ी की मेंटेनेंस के 3400 रुपये बकाया है। 619760 रुपये स्ट्रीट लाइटों की मेंटेनेंस का बकाया

नगर परिषद ने स्ट्रीट लाइटों की मेंटेनेंस का ठेका दिया हुआ था। ठेकेदार के 619760 रुपये बकाया हैं। पेमेंट के भुगतान के लिए ठेकेदार नगर परिषद कार्यालय के चक्कर काट रहा है। --टोहाना की एक एजेंसी का 6.89 लाख रुपये तथा रणजीत ठेकेदार का 13.26 लाख रुपये का बिल रुका हुआ है। वहीं एक अन्य निर्माण एजेंसी का 10 लाख रुपये का बिल रुका हुआ है। बिलों में है गड़बड़ी, जांच के बाद करेंगे हस्ताक्षर

कई बिल ऐसे हैं, जो संदेह के घेरे में हैं। इनमें से कुछ बिलों को लेकर लिखित में शिकायत भी आई हुई है। जिनकी जांच करके आगे की कार्रवाई की जाएगी। एक बिल जयंती देवी पार्क का है, उसमें भी फर्जी बिल लगाए गए हैं। वहीं ईओ की गाड़ी भी प्रतिदिन गलत तरीके से ज्यादा किलोमीटर चलाई दिखाई गई है।

पूनम सैनी, प्रधान, नगर परिषद, जींद निरीक्षण के लिए शहर में जाना होता है : ईओ

पॉलीथिन पकड़ने, चालान करने समेत कई तरह के निरीक्षण के लिए शहर में जाना होता है। उन्हें ड्यूटी मजिस्ट्रेट भी नियुक्त किया हुआ है। इसलिए भी कार्यालय से बाहर जाना होता है। गाड़ी कितनी चलती है, ये लॉन्ग बुक में दर्ज होता है और ये काम चालक का होता है। इससे उनका कोई लेना-देना नहीं होता।

डा. एसके चौहान, ईओ, नगर परिषद जींद

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