जागरण संवाददाता, जींद : जैन साध्वी डॉ. कुंदन रेखा ने कहा कि सांस और आहार के बिना जीवन संभव नहीं है। सांस बंद होते ही जीवन यात्रा समाप्त हो जाती है और आहार बंद होने के कुछ दिन बाद जीवन खत्म हो जाता है। आज सबसे महत्वपूर्ण यह है कि आहार कैसा होना चाहिए। मांसाहार के ज्यादा प्रचलन ने इंसान के मानसिक संतुलन को बिगाड़ दिया है।

हैप्पी स्कूल के पास स्थित तेरापंथ भवन में आयोजित प्रवचन में डॉ. कुंदन रेखा ने कहा कि मांस और अंडे में प्रोटीन ज्यादा होता है। यह शरीर को फायदा करने के बजाय नुकसान पहुंचाता है। बाजरे से जो प्रोटीन मिलता है, उसके सामने मांस का प्रोटीन नगण्य है। बाजरे का प्रोटीन स्वास्थ्यप्रद होता है और मांस का प्रोटीन रोग लाता है। मांसाहारी और अंडा खाने वाला व्यक्ति जितना भयंकर बीमारियों से ग्रस्त होता है, उतना शाकाहारी कभी नहीं होता। मांसाहारी धीरे-धीरे मादक पदार्थो का प्रयोग करने लगा जाता है। मांस पचाने के लिए नमक ज्यादा लेता है। फिर शराब पीने लग जाता है। इससे गुर्दे खराब हो जाते हैं। ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है। डॉ. कुंदन रेखा ने कहा कि कहावत है कि जैसा खाए अन्न, वैसा होवे मन, इसलिए तामसी भोजन से बचना चाहिए। आचार्य भिक्षु ने त्याग को धर्म की संज्ञा दी है तथा भोग को अधर्म की संज्ञा दी है, इसलिए हमें अपने जीवन के कीमती क्षणों को शुभ योग में लगाना चाहिए न कि अशुभ योगों में। इस मौके पर राजेश जैन, कुणाल मित्तल, मास्टर नारायण ¨सह रोहिल्ला, राजन, गौरव, प्रवीण, संदीप, दीपक गोयल, संजय, रीतेश आदि मौजूद रहे।

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