प्रदीप घोघड़ियां, जींद

भारतीय संस्कृति की आत्मा रामलीला उत्सव पर भी कोरोना का साया मंडरा रहा है। कोरोना संक्रमण के कारण इस बार रामलीला मंचन पर संशय के बादल नजर आ रहे हैं। आजादी के बाद से ही हर साल शहर में होती आ रही रामलीला इस बार होगी या नहीं, इसे लेकर प्रशासन की तरफ से कोई गाइडलाइन नहीं आई है। हालांकि रामलीला का मंचन करने वाले कलाकारों का कहना है कि बेशक वे रिहर्सल नहीं कर पाए हों लेकिन अगर प्रशासन अनुमति देता है तो वे मंचन के लिए पूरी तरह से तैयार हैं।

हर साल श्राद्ध खत्म होते ही रामलीला के मंचन की खातिर कलाकार रिहर्सल में जुट जाते थे। इस बार ऐसा कुछ अभी तक नजर नहीं आ रहा। रामलीला मैदान के रंगमंच सूने पड़े हैं। 25 अक्टूबर को दशहरा है। एक महीने पहले ही रामलीला का मंचन शुरू हो जाता है। शहर में पांच जगहों पर रामलीला की जाती है। सबसे पुरानी रामलीला पुरानी कचहरी के पास होती है तो वहीं सबसे प्रसिद्ध रामलीला का मंचन किला पर किया जाता है। इसका लाइव प्रसारण भी किया जाता है। इसके अलावा सैनी रामलीला ग्राउंड, रेलवे स्टेशन और लोको कालोनी में भी रामलीला मंचन हर साल होता है।

किले पर 1955 से होती आ रही रामलीला, इस बार संशय के बादल

शहर में किले पर 1955 से हर साल रामलीला का मंचन होता आ रहा है। 1965 में एक बार यहां पर पानी भरने के कारण भारत सिनेमा में मंचन करना पड़ा था। अगस्त महीने में ही रामलीला मंचन को लेकर रिहर्सल शुरू हो जाती थी लेकिन इस बार अभी तक रिहर्सल शुरू नहीं हो पाई है। दशकों से रामलीला का मंचन करते आ रहे संतलाल चुघ ने बताया कि वह सरकार के इशारे का इंतजार कर रहे हैं। वह दिल्ली में होने वाली लव-कुश रामलीला मंचन वालों के संपर्क में हैं। अगर उनको अनुमति मिल जाती है तो फिर स्थानीय स्तर पर भी रामलीला का मंचन शुरू हो जाएगा।

कलाकार तैयार, प्रशासन की अनुमति का इंतजार

संतलाल चुघ ने बताया कि बेशक उन्होंने अभी तक रिहर्सल शुरू नहीं की है लेकिन उनके पास परिपक्व कलाकार हैं। अगर सरकार से इजाजत मिल जाती है तो वह तुरंत रिहर्सल शुरू कर देंगे और थोड़ी रिहर्सल में भी बेहतर परफोरमेंस दे देंगे। प्रशासन को गाइडलाइन जारी करनी चाहिए। वह कोविड-19 के नियमों का पालन करते हुए रामलीला का मंचन करेंगे।

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