जागरण संवाददाता, जींद : नागरिक अस्पताल के डॉक्टरों ने 11 महीने के बच्चे की मौत के बाद उनके परिजनों को खूब दर्द दिया। अस्पताल में लाने से पहले प्राण छोड़ चुके बच्चे का शव सौंपने के लिए डॉक्टरों ने 20 घंटे तक परिजनों के खूब चक्कर कटवाए। यहां तक कि भाजपा विधायक डॉ. कृष्ण मिढ़ा के कहने पर भी डॉक्टरों ने शव नहीं सौंपा और पोस्टमार्टम पर अड़े रहे। आखिर में मंगलवार को खुद विधायक अस्पताल पहुंचे और डॉक्टरों को खूब झाड़ पिलाई। इसके बाद बच्चे का शव परिजनों को सौंपा गया। मिढ़ा ने कहा कि विधायक के कहने पर भी अस्पताल प्रशासन ने परिजनों को इतना तंग किया। यहां आम आदमी का क्या हाल होता होगा।

मामला यह है कि रोहतक रोड निवासी 11 महीने के बच्चे रूद्र का रोहतक के निजी अस्पताल में इलाज चल रहा था। सोमवार को वहां उसकी मौत हो गई। डॉक्टरों ने डेथ सर्टिफिकेट देकर बच्चा परिजनों को सौंप दिया। घर आने के बाद परिजन जब बच्चे को मिट्टी देने जा रहे थे तो उन्हें उम्मीद जगी कि अभी प्राण बचे हुए हैं। परिजन तुरंत बच्चे को रोहतक रोड स्थित निजी अस्पताल में ले गए। वहां से दूसरे निजी अस्पताल में भेज दिया। वहां से सरकारी अस्पताल में भेज दिया, जहां ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर डॉ. मनोज जांगड़ा ने कहा कि बच्चे की मौत हो चुकी है। परिजन जब बच्चे को लेकर चलने लगे तो डॉक्टर ने कहा कि पोस्टमार्टम के बाद ही बच्चे को सौंपेंगे। परिजनों ने कहा कि उनके पास डेथ सर्टिफिकेट है। वह तो सिर्फ जिंदा होने की उम्मीद में जांच करवाने आए थे। लेकिन डॉक्टर पोस्टमार्टम पर अड़ा रहा। इसके बाद परिजनों ने भाजपा विधायक डॉ. कृष्ण मिढ़ा से बात की। विधायक ने सीएमओ डॉ. शशी प्रभा अग्रवाल से फोन करके बच्चे का शव सौंपने के लिए कहा। बावजूद इसके अस्पताल प्रशासन ने बच्चा नहीं सौंपा। बच्चे के परिजन डेड बॉडी लेने के लिए पूरी रात चक्कर काटते रहे। मंगलवार सुबह खुद विधायक अस्पताल पहुंचे और डॉक्टरों को झाड़ पिलाई। इसके बाद बिना पोस्टमार्टम किए परिजनों को बच्चा सौंपा गया।

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अस्पताल ने लोगों को पागल बना रखा

अस्पताल पहुंचे विधायक डॉ. कृष्ण मिढ़ा ने कहा कि कई बार मौत के बाद भी आदमी में प्राण आ जाते हैं। इसी शक में परिजन बच्चे को अस्पताल लाए थे। यह कोई एक्सीडेंटल केस नहीं था। बच्चे में प्राण नहीं थे तो डेथ घोषित करके बच्चा परिजनों को सौंप देना चाहिए था। खुद उन्होंने सोमवार शाम को सीएमओ से बात की। पूरी रात निकल गई। सुबह भी मैंने सीएमओ से बात की। सीएमओ कहती हैं कि थाने वालों से लिखवाकर लाओ। थाने वाले कहते हैं कि सीएमओ मैडम लिखेंगी, तब हम डेड बॉडी देंगे। यही नहीं समझ आ रहा है कि हो क्या रहा है। इस तरह से चलेगा, तो आम आदमी इतना परेशान है, उसके लिए क्या होगा। लोगों को पागल बना रखा है। अगर एक विधायक के कहने पर अस्पताल प्रशासन व डॉक्टर अमल नहीं कर रहे हैं तो आम आदमी का हाल होगा, उसका अंदाजा लगा सकते हैं।

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विधायक के बुलाने पर भी नहीं आई सीएमओ

विधायक डॉ. कृष्ण मिढ़ा ने कहा कि सरकारी अस्पताल का बुरा हाल हो चुका है। पिछले दिनों भी वह यहां घायल बच्चों को लेकर आए थे तो सिक्योरिटी गार्ड पट्टी कर रहे थे। ये आलम यहां का है। यहां डॉक्टरों की कमी है, लेकिन जो डॉक्टर हैं, उन्हें तो अपनी ड्यूटी अच्छे से देनी चाहिए। जब एक अस्पताल ने बच्चे को डेथ घोषित कर दिया तो इन्हें डेड बॉडी देने में क्या दिक्कत थी। यहां आम आदमी को परेशान किया जा रहा है। डॉ. मिढ़ा ने कहा कि सोमवार को सीएमओ मैडम को फोन किया। अब अस्पताल में आने के बाद भी फोन किया। लेकिन विधायक के कहने पर भी सीएमओ अस्पताल में नहीं आई। उनकी जगह मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. गोपाल आए और बच्चे की डेड बॉडी परिजनों के सुपुर्द करवाई।

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बीमार होने के बाद लोग पहले ही ज्यादा परेशानी में होते हैं। लेकिन जींद के सरकारी अस्पताल का प्रशासन मरीजों को सुविधाएं देने के बजाय बहुत परेशान करता है। अस्पताल की मुखिया सीएमओ डॉ. शशी प्रभा अग्रवाल यहां ठीक काम नहीं कर रही हैं। बिना पोस्टमार्टम डेड बॉडी सौंपने का कानून था तो 20 घंटे चक्कर कटवाकर अब क्यों दी? कानून नहीं था तो धक्के क्यों कटवाए। यह गरीब लोगों के साथ मजाक नहीं तो क्या है। सीएमओ के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग के महानिदेशक से बात करेंगे और विभाग से जवाब मांगेंगे।

-डॉ. कृष्ण मिढ़ा, भाजपा विधायक, जींद

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अस्पताल में लाने के बाद रूक्का काट दिया गया था। एक बार रूक्का कटने के बाद डेड बॉडी पुलिस की कस्टडी में हो जाती है। जिस डॉक्टर ने बच्चे को मृत घोषित किया, वह रात 8 बजे ड्यूटी पूरी करके चला गया था। रात में दाह संस्कार होता नहीं है। सुबह विधायक ने एसडीएम व सीएमओ से बात की तो रूक्का निरस्त करके बच्चा सौंप दिया गया।

-डॉ. गोपाल गोयल, मेडिकल सुपरिटेंडेंट, सामान्य अस्पताल, जींद

Posted By: Jagran

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