जागरण संवाददाता, जींद: प्रधानमंत्री कृषि सिचाई योजना के अंतर्गत फव्वारा और टपका सिचाई संयंत्र लगाने वाले किसानों को 18 हजार से 20 हजार रुपये का अनुदान दिया जाएगा। जिले में कपास की खेती 65 हजार हेक्टेयर में की जाती है। जिला कृषि उपनिदेशक सुरेंद्र मलिक ने बताया कि फव्वारा सिस्टम से सिचाई में लागत कम आती है और कम से कम पानी से सिचाई हो जाती है। इस स्कीम के अंतर्गत ज्यादा से ज्यादा किसानों को लाभ देने के लिए जिन-जिन गांवों में अधिक कपास की खेती की जाती है। उन गांवों में किसानों को फव्वारा और टपका सिचाई के लिए प्रेरित करने के लिए जागरूकता कैंप लगाए जाएंगे। कृषि विज्ञान केंद्र पिडारा के वैज्ञानिक डॉ. यशपाल मलिक के बताया कि जब-जब कपास के सीजन में लंबे समय तक बारिश नहीं होने के कारण सूखे की स्थिति बनती है। उस समय कपास फसल में सफेद मक्खी को प्रकोप बहुत होता है। इसे कीटनाशक के स्प्रे से नियंत्रण नहीं किया जा सकता। अगर किसान अपने खेत में फव्वारा लगवा लें और 10 से 12 दिन के अंतराल पर फव्वारा सिचाई कर दें, तो सफेद मक्खी पनपने नहीं पाती। कैंप का शेड्यूल:

गांव ईगराह में चार फरवरी को, ढांडा खेड़ी गांव में पांच फरवरी को, नचार खेड़ा गांव में छह फरवरी को, संगतपुरा में सात फरवरी को, कमाच खेड़ा में 11 फरवरी को, मालवी व दुर्जनपुर गांव में 12 फरवरी को, भौंगरा व उचाना खुर्द में 13 फरवरी को तथा बिटानी गांव में 14 फरवरी को कैंप लगेंगे। कैंप में मौके पर ही अनुदान राशि पाने के लिए इच्छुक किसानों का पंजीकरण भी कराएंगे। ऐसेसे मिलेगा किसानों को अनुदान

किसान इस योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए कृषि व बागवानी विभाग की साइट पर अपना पंजीकरण करवा सकते हैं। खरीफ व रबी फसलों का पंजीकरण सहायक भूमि संरक्षण अधिकारी जींद कार्यालय, हमेटी में तथा सब्जी व बागों के लिए अपना पंजीकरण जिला उद्यान अधिकारी जींद के कार्यालय में निशुल्क करवा सकते हैं।

Posted By: Jagran

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