जागरण संवाददाता, जींद : ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट के निर्देशानुसार बुधवार को शहर के केमिस्टों ने काली पट्टी लगाकर रोष प्रकट किया। कैमिस्ट एंड ड्रग संगठन के प्रधान अर¨वद ने बताया कि कुछ व्यापारिक कंपनियां जोकि पहले सामान्य वस्तुएं जूते, कपडे़, रेडीमेड कपडे, इलेक्ट्रानिक व मोबाइल की बिक्री कर रही है, अब दवाइयों का आनलाइन कारोबार शुरू करना चाहती है जबकि ड्रग एक्ट में कोई प्रावधान नहीं है।

उन्होंने कहा कि करोड़ों रुपये की पूंजी वाली बड़ी-बड़ी कंपनियां हैं, जिन्होंने भारत सरकार के साथ मिलकर अपना दबाव बनाया है, जिससे ऑनलाइन दवाइयों की बिक्री की अनुमति के लिए भारत सरकार ने एक कमेटी का गठन किया है। उन्होंने कहा कि रिटेल का व्यवसाय चलाने के लिए सभी दुकान के किराये से लेकर, बिजली के बिलों तक रकम का वहन करना पड़ता है। आनलाइन बिक्री से व्यवसाय पर बहुत गहरा असर पड़ेगा। एआइओसीडी के सदस्यों ने पीएम से आनलाइन बिक्री की अनुमति न देने की मांग की। दवाइयों की ऑनलाइन बिक्री करने से काफी हद तक मरीजों को नुकसान हो सकता है।

ये हो सकते है नुकसान

सबसे पहले डॉक्टर की पर्ची असली है या नकली इसका दुरुपयोग होगा। आनलाइन दवाईयां होने से डॉक्टर का असली या नकली होने का पता लगाना मुश्किल होगा। अगर दवाईयों की गलत डिलीवरी हो जाती है तो उसका जिम्मेवार कौन। आनलाइन आर्डर कर देने के बाद दवाई तीन-चार दिन बाद आएगी, तब तक मरीज का क्या होगा। गलत दवा आने की संभावनाएं बनी रहेगी। किसी भी प्रकार की दवाई वापस करने की प्रक्रिया काफी लंबी होगी। जिन दवाइयों को कोल्ड चेन में रखना अनिवार्य है

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