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दंगल में हलवाई की बेटी की धाक, झज्जर की रूपांशी ने जीता हरियाणा केसरी का गोल्ड, 53 KG की प्रतियोगिता में बनी चैंपियन

Published: Tue, 03 Nov 2026 02:01 PM (IST)

झज्जर की रूपांशी ने सोनीपत में आयोजित प्रतियोगिता में 53 किलोग्राम भार वर्ग में 'हरियाणा केसरी' का स्वर्ण पदक जीता ...और पढ़ें

झज्जर की रूपांशी ने सोनीपत में जीता गोल्ड (जागरण फोटो)

झज्जर की रूपांशी ने सोनीपत में जीता गोल्ड (जागरण फोटो)

HighLights

  1. रूपांशी ने 53 किग्रा वर्ग में हरियाणा केसरी स्वर्ण जीता

  2. सिलाना गांव की बेटी ने कुश्ती में अपनी धाक जमाई

  3. कड़ी मेहनत और हरियाणवी डाइट से मिली यह सफलता

जागरण संवाददाता, झज्जर। वीरों और खिलाड़ियों की भूमि झज्जर ने कुश्ती के अखाड़े में एक बार फिर अपनी धाक जमाई है। क्षेत्र के गांव सिलाना स्थित गुरु गोरखनाथ अखाड़ा की होनहार पहलवान रूपांशी (इशू) ने अपनी कड़ी मेहनत, अनुशासन और दृढ़ संकल्प के बल पर कुश्ती जगत में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है।

राई स्पोर्ट्स एकेडमी, सोनीपत में आयोजित प्रतिष्ठित प्रतियोगिता के 53 किलोग्राम भार वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए रूपांशी ने ''हरियाणा केसरी'' का स्वर्ण पदक अपने नाम किया है।

जबकि, बीते जून माह में उन्होंने उत्तर प्रदेश के गोंडा में आयोजित अंडर-17 राष्ट्रीय महिला कुश्ती चैंपियनशिप के 53 किलोग्राम भार वर्ग में शानदार प्रदर्शन कर उन्होंने स्वर्ण पदक जीता था। साथ ही हरियाणा राज्य स्तरीय इंटर अखाड़ा कुश्ती चैंपियनशिप में भी उन्होंने 53 किग्रा वर्ग में गोल्ड मेडल अपने नाम किया था।

अखाड़े की शुरुआत से नेशनल गोल्ड तक का सफर

महज 9 साल की उम्र में जब गांव में अखाड़ा खुला था, तो रूपांशी शौक-शौक में वहां पहुंच गई थीं। शुरुआत में वह अखाड़े में अकेली लड़की थीं, जिसे लेकर बातें भी हुईं, लेकिन उनके माता-पिता ने हर कदम पर अपनी बेटी का संबल बनकर उसका साथ दिया। रूपांशी एक बेहद साधारण परिवार से ताल्लुक रखती हैं।

उनके पिता तिलक राज गांव में ही हलवाई का काम करते हैं और उनकी माता एक घरेलू महिला हैं। दो बहनों और एक बड़े भाई में सबसे छोटी रूपांशी ने यह साबित कर दिया है कि यदि हौसला बुलंद हो, तो विपरीत परिस्थितियां भी सफलता का रास्ता नहीं रोक सकतीं। खेल के साथ-साथ पढ़ाई में भी रुचि रखते हुए उन्होंने 12वीं कक्षा की परीक्षा 60 प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्ण की है।

कड़ी मेहनत और ठेठ हरियाणवी डाइट का कमाल

चैंपियन पहलवान रूपांशी अपनी सफलता का श्रेय अपनी कठोर मेहनत और पारंपरिक जीवनशैली को देती हैं। वह रोजाना सुबह और शाम तीन-तीन घंटे अखाड़े में पसीना बहाती हैं।

उनकी ऊर्जा का राज उनकी ठेठ हरियाणवी डाइट है, जिसमें शुद्ध दूध, दही, देसी घी, चूरमा, खीर और अभ्यास के तुरंत बाद बादाम रगड़ा मुख्य रूप से शामिल है। रूपांशी की इस उपलब्धि पर उनके पिता लक राज, गुरु गोरखनाथ अखाड़ा के प्रशिक्षकों और समस्त ग्रामवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं मिल रही हैं।

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