विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 05, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

एक बार फिर नए सिरे से मातनहेल में जगी सैनिक स्कूल के निर्माण की उम्मीद

By JagranEdited By:
Published: Tue, 05 Jul 2022 11:50 PM (IST)

प्रक्रिया के तहत अब मातहेल में सैनिक स्कूल बनने का रास्ता तय होता दिख रहा है। दशकों से क्षेत्र में ...और पढ़ें

एक बार फिर नए सिरे से मातनहेल में जगी सैनिक स्कूल के निर्माण की उम्मीद
एक बार फिर नए सिरे से मातनहेल में जगी सैनिक स्कूल के निर्माण की उम्मीद

संवाद सूत्र, साल्हावास (झज्जर): प्रक्रिया के तहत अब मातहेल में सैनिक स्कूल बनने का रास्ता तय होता दिख रहा है। दशकों से क्षेत्र में सैनिक स्कूल बनने की मांग उठ रही है। लेकिन लंबे समय से स्थान तय नहीं हो पाने की वजह से भवन का निर्माण नहीं हो पा रहा। बहरहाल, सरकार की ओर से जारी किए गए ताजा आदेशों में अब मातनहेल से नीमली रोड पर 61 एकड़ भूमि पर निर्माण की मंजूरी दी गई है। जबकि, पूर्व के समय पर पंचायतों की ओर से लीज पर दी गई 301 एकड़ जमीन को इन्हीं आदेशों के माध्यम से वापिस लौटाया जा रहा है। दोनों गांवों को वापिस मिलेगी 301 एकड़ जमीन

बता दें कि मार्च में प्रशासन की ओर से भेजे गए पत्र में कहा गया कि मातनहेल व रूड़ियावास की ग्राम पंचायत की तरफ से पारित प्रस्ताव के अनुसार 301 एकड़ सामूहिक जमीन उपहार स्वरूप सैनिक स्कूल की स्थापना के लिए दी गई थी, लेकिन जमीन पर सेक्शन चार व पांच लगने के कारण सैनिक स्कूल का भवन निर्माण उचित नहीं है। इसमें 259 एकड़ भूमि मातनहेल व 42 एकड़ भूमि ग्राम पंचायत रूड़ियावास की है। दोनों ग्राम पंचायतें अपने प्रस्ताव के अनुसार वापस लेना चाहती हैं। जबकि ग्राम पंचायत मातनहेल की तरफ से सैनिक स्कूल के निर्माण के लिए 61 एकड़ भूमि अलग से दी गई है। जिस पर सैनिक स्कूल जनहित में स्थापित किया जा सकता है। उपायुक्त की तरफ से चार मार्च को यह पत्र महानिदेशक विकास एवं पंचायत विभाग हरियाणा को भेज दिया था। अब पहली जमीन का प्रस्ताव रद्द करते हुए नई जमीन पर सैनिक स्कूल बनाने के लिए आदेश जारी किए गए हैं। 2003 में रक्षामंत्री ने रखी थी आधारशिला

पुराने समय की बात करें तो 30 जनवरी 1983 को मातनहेल के तत्कालीन सरपंच दलेल सिंह ने जिला सैनिक बोर्ड को प्रस्ताव भेजा था। जिसके बाद 17 सितंबर 1987 को तत्कालीन सरपंच महासिंह की तरफ से भी प्रस्ताव भेजा गया। 2002 में तत्कालीन सरपंच बादामो देवी की तरफ से तीसरी बार प्रस्ताव पारित कर जिला सैनिक बोर्ड को दिया गया। 2003 में तत्कालीन रक्षामंत्री जार्ज फर्नाडिस व प्रदेश के मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला ने सैनिक स्कूल के निर्माण के लिए आधारशिला रखी थी। उसके बाद इस स्कूल को तब्दील कर रेवाड़ी जिले के पाली गोठड़ा में बना दिया गया था। भाजपा की सरकार आने के बाद स्कूल के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने आधारशिला रखी और करीब 100 एकड़ भूमि में सैनिक स्कूल का निर्माण करवाने के लिए 50 करोड़ रुपये का प्रावधान भी बजट में किया था। पहले की जमीन पर वन विभाग ने जताई थी आपत्ति

दरअसल, स्कूल के नाम से दी गई भूमि पर वन विभाग ने अधिकार जता दिया था। साथ ही कहा कि स्कूल के लिए दी जाने वाली भूमि में कुछ हिस्सा वन विभाग का है। सेक्शन चार व पांच के तहत दी गई भूमि पर स्कूल नहीं बनाया जा सकता। पंचायत की भूमि पर स्कूल का निर्माण कर सकते हैं। रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत सैनिक स्कूल सोसायटी द्वारा संचालित सैनिक स्कूलों में कक्षा छह से 12वीं तक पढ़ाई होती है। बोर्डिग सुविधाओं से परिपूर्ण सैनिक स्कूलों में केवल लड़कों के लिए ही शिक्षा की सुविधाएं हैं। कक्षा छह व कक्षा नौ में प्रवेश परीक्षा, मेडिकल टेस्ट आदि के माध्यम से दाखिले का प्रावधान है। भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय ने सेना, नौ सेना व वायु सेना में होनहार युवाओं को बतौर अफसर तैयार करने के लिए देशभर में सैनिक खोले हैं। मीटिग करते हुए विस्तार से हुई चर्चा

वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से कर्नल जय सिंह सुहाग, सुबेदार श्रद्धानंद, कप्तान धर्मपाल सुहाग, लेफ्टिनेंट जयभगवान, सुबेदार सत प्रकाश, सुबेदार धर्मबीर सिंह, कप्तान जय प्रकाश, कप्तान बिजेंद्र सिंह, सुबेदार जय भगवान, सुबेदार मेजर महेंद्र सिंह शर्मा, सुबेदार मेजर धर्मपाल सिंह, हलवदार जय सिंह रंगा व अन्य पूर्व सैनिकों ने भाग लिया। जिसमें जिला प्रशासन एवं सरकार का आभार व्यक्त करते हुए कहा गया कि शीघ्रता से अब निर्माण से जुड़े कार्य होने चाहिए। ताकि क्षेत्र के बच्चों को फायदा पहुंचें।