जेएनएन, झज्जर। देश में बच्चों के खिलाफ बढ़ रहीं अपराधिक घटनाओं पर शांति के नोबल पुरस्कार से सम्मानित कैलाश सत्यार्थी ने कहा कि बच्चे घरों, स्कूलों या आस-पड़ोस तक में कहीं भी सुरक्षित नहीं हैं। कभी कोई रिश्तेदार मासूम बच्चे को अपना शिकार बनाता है तो कभी स्कूल में भी बच्चा यौन शोषण का शिकार हो जाता है।

ऐसी घटनाओं के अपराधी आजाद घूमते हैं। जिस तरह का माहौल बना हुआ है, उसे देखते हुए मैं भारत को बलात्कारियों का देश कतई नहीं बनने दूंगा। बाल यौन शोषण, बाल ङ्क्षहसा और बच्चों की खरीद फरोख्त की घटनाओं पर अंकुश लगाने के मकसद से ही भारत यात्रा शुरू की गई है। कैलाश सत्यार्थी ने यह बातें शनिवार को रेवाड़ी, झज्जर और रोहतक में लोगों से कही। इस दौरान सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों के पदाधिकारियों ने उनका स्वागत किया। इस दौरान उनकी पत्नी सुमेधा सत्यार्थी भी साथ रहीं।

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पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि आज यह कैसी आजादी है? बेटी शाम को एक घंटा लेट आती है तो मां उसे दर्जनों कॉल कर देती है। इसे क्या कहें, यह डर है या आजादी। कोई बोले न बोले, सत्यार्थी तो जरूर बोलेगा। कैलाश सत्यार्थी ने कहा कि उन्होंने बलात्कार, यौन उत्पीडऩ तथा बाल तस्करी जैसे अपराधों के खिलाफ युद्ध की घोषणा की है।

उन्होंने कहा कि 11 हजार किमी. की इस यात्रा में समाज का हर वर्ग उनसे जुड़ रहा है। यात्रा के समापन पर 16 अक्टूबर को वह राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मिलेंगे। उन्होंने कहा कि हर घर में पुलिस को बैठाना संभव नहीं इसलिए बच्चों व अभिभावकों को खुद भी जागरूक होना होगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत यात्रा अभियान भारत को बच्चों के लिए फिर से सुरक्षित बना देगा।

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रेवाड़ी से होते हुए झज्जर के माछरौली स्थित राजकीय विद्यालय के बाद खातीवास स्थित संस्कारम पब्लिक स्कूल में पहुंचे सत्यार्थी के साथ बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्य एवं यात्रा के प्रदेश संयोजक बाल कृष्ण गोयल, दैनिक जागरण हिसार यूनिट के महाप्रबंधक राहुल मित्तल, स्कूल के चेयरमैन महिपाल, एसडीएम प्रदीप कौशिक, डीएसपी हंसराज बिश्नोई सहित अन्य भी मौजूद रहे।

गुरुग्राम की घटना से प्रदेश का नाम हुआ बदनाम

कैलाश सत्यार्थी ने गुरुग्राम के रेयान स्कूल में दूसरी कक्षा के छात्र की हत्या मामले पर कहा कि इस घटना से प्रदेश का नाम देशभर में बदनाम हुआ है। उन्होंने बताया कि प्रद्युम्न के माता पिता का फोन उनके पास आया था कि उनके बच्चे का क्या कसूर था। वह तो पढऩे के लिए गया था। उन्होंने सैकड़ों बच्चों से उनके अभिभावकों की मौजूदगी में शपथ दिलवाई और आह्वान किया कि वह न तो रुकेंगे, न झुकेंगे और न ही डरेंगे। इस दौरान उनके विचारों को सुनने के साथ-साथ सेल्फी करवाने वालों की भी होड़ लगी रही।

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Posted By: Ankit Kumar

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