- किसान लगातार खेतों में रखे निगरानी, पता लगते ही विशेषज्ञों की सलाह से करें उपचार फोटो : 25 जेएचआर 1 जागरण संवाददाता,झज्जर : आ‌र्द्रता में बढ़ोतरी सरसों के लिए हानिकारक सिद्ध हो सकती है। क्योंकि आ‌र्द्रता अधिक होने से तना गलन जैसे बीमारी आ सकती है। जब सरसों की फसल 50 से 80 दिन की होती है उस समय बीमारियों का अधिक खतरा होता है। इसके लिए किसानों को सावधानी बरतनी होगी। जिसके लिए किसान अपने खेतों में निरंतर जाते रहे और फसलों पर निगरानी रखें। तना गलन बीमार का पता लगते ही विशेषज्ञों से सलाह लेकर इसका उपचार करवाएं। तना गलन बीमारी के कारण सरसों का तना गलने लगता है और पौधा सूखने लगता है। ऐसे में इस बीमारी का समय पर उपचार करना आवश्यक है। अगर समय से उपचार नहीं हो पाया तो इसका पैदावार पर भी बुरा असर पड़ेगा। विशेषज्ञों के अनुसार जिन खेतों में पिछले वर्ष तना गलन बीमारी की समस्या थी। उस खेत में तना गलन बीमारी आने की अधिक संभावना होती है। इसलिए किसानों को बीज उपचार करना चाहिए। अगर तना गलन की बीमार दिखाई दे तो किसान कार्बेंडिजम नामक दवाई का छिड़काव कर सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार कार्बेंडिजम नामक दवाई की दो ग्राम मात्रा को प्रति लीटर पानी के हिसाब से मिलाना होगा। इस घोल का स्प्रे खेत में करना होगा। एक एकड़ में लगने वाले पानी के अनुसार प्रति लीटर के हिसाब से कार्बेंडिजम दवाई डालकर स्प्रे करनी चाहिए। इससे सरसों की फसल को तना गलन बीमारी से बचाया जा सकता है। - कृषि विभाग के एडीओ डा. अशोक सिवाच ने बताया कि किसान सरसों की फसल का तना गलन से बचाने के लिए सावधानी बरतें। समय-समय पर खेतों में जाकर निगरानी रखें। तना गलन की शिकायत मिलने पर कार्बेंडाजिम नामक दवाई का छिड़काव करें। हालांकि अभी तक जिले में इसका अधिक प्रभाव नहीं हुआ है, हालांकि किसानों को सावधानी बरतनी चाहिए।

Indian T20 League

शॉर्ट मे जानें सभी बड़ी खबरें और पायें ई-पेपर,ऑडियो न्यूज़,और अन्य सर्विस, डाउनलोड जागरण ऐप

kumbh-mela-2021