अमित पोपली, झज्जर

खेत में उन्नत पैदावार के बाद अब ग्राहक के घर तक पहुंचने की प्रक्रिया किसानों को रास आने लगी है। एक कदम आगे बढ़ाकर अग्रणी बने इन किसानों को उद्यमी शब्द का मतलब समझ में आ रहा है।

परिणामस्वरूप ऐसी विधा को सिखाने और सीखाने सहित उत्तम किस्म का जहर रहित भोजन पैदा करने, मिट्टी की सेहत का ध्यान रखने सहित अन्य अह्म विषयों को केंद्रित कर दो दिन पहले सासरोली गांव स्थित जहर मुक्त फार्म पर एक कार्यशाला का आयोजन हुआ। जिसमें झज्जर सहित सोनीपत, दिल्ली, भिवानी तथा हिसार से 25 किसान शामिल हुए। इनमें मुख्य रूप से दिल्ली से वैद्य श्रीभगवान शर्मा, सोनीपत से किसान उद्यमी सत्यवान, रोहतक से डा. नरेंद्र दहिया, किसान उद्यमी नीलम आर्य आदि ने अपने अनुभव सांझा करते हुए किसानों को प्रेरणादायक उदाहरण पेश किए। दरअसल, कार्यशाला में शामिल लोगों में काफी ऐसे हैं जो कि खेतों में पैदा होने वाले उत्पादों को मंडी में बेचने की बजाय सीधा ग्राहक तक पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं। आर्गेनिक खेती ने बदली किसान की सोच

दरअसल, परंपरागत खेती के तरीकों को छोड़कर ऑर्गेनिक पद्धति से खेती करने वाले किसानों के लिए बाजार में अपार संभावनाएं दिखी हैं। कार्यशाला में उपस्थित किसानों ने बताया कि किस तरह से वह अपने खेत में पैदा हो रहे उत्पादों को व्हाट्सएप, फेसबुक, वेबसाइट आदि के माध्यम से ग्राहक के घर तक पहुंचा रहे हैं। ग्राहकों के मन में पैदा हो रहे विश्वास को बरकरार रखने के लिए वह निरंतर कार्य कर रहे हैं। विशेष तौर पर एनसीआर क्षेत्रों के ग्राहकों को साइट पर आमंत्रित किया जाता है। उन्हें तैयार किए जाने वाले उत्पाद के अलावा खेती में इस्तेमाल होने वाले संसाधनों की जानकारी भी दी जाती है। क्योंकि, खान-पान के तौर तरीकों को बदलते हुए स्वस्थ रहने की दिशा में कदम बढ़ा रहे ग्राहक भी ऐसे किसानों के उत्पादों को बाजार भाव से दोगुना तक खरीदते हैं। जहर रहित उत्तम भोजन पैदा करने प किया विचार

कार्यशाला में एक ओर जहां उत्तम किस्म का जहर रहित भोजन पैदा करने के लिए विचार विमर्श हुआ। वहीं मिट्टी की सेहत में सुधार करने, पानी का सही उपयोग तथा प्राकृतिक पदार्थों का पूर्ण उपयोग करते हुए कैसे खेती की जा सकती है, विशेषज्ञों ने अपनी बात रखीं। साथ ही सभी ने सहज भाव से अन्य लोगों को भी इस प्रक्रिया से जुड़ने के लिए आमंत्रित किया। ताकि, ग्राहकों की जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ बाजार की सोच में भी बदलाव लाया जा सके। निरंतर सीखना और अच्छी बातों को आपस में साझा करने से सदैव फायदा होता है। आर्गेनिक खेती करने वाले किसान और ग्राहकों का उन पर विश्वास, दोनों अहम विषय है। इसीलिए, सेवाओं को और कैसे बेहतर बनाया जाए, को लेकर विस्तार से सासरौली के फार्म पर चर्चा हुई है।

नीलम आर्य, अग्रणी उद्यमी किसान

Edited By: Jagran