- आठवें नवरात्र पर श्रद्धा के साथ हुई मां गौरी की पूजा - नवरात्र में व्रत रखने वालो ने कन्या पूजन के साथ अपने व्रत सम्पन्न किए

जागरण संवाददाता, झज्जर :

कोरोना की वजह लगातार ऐसा समय आया है जब बगैर कंजकों को जिमाए मां की पूजा हो रही हैं। कारण कि लोग भी अपनी बच्चियों को पूजा के लिए नहीं भेज रहे हैं। जबकि, पूजा करते हुए लोग कोरोना से मुक्ति की ईच्छा करते हुए मां की अराधना कर रहे हैं। हालांकि, कुछ लोग अपने परिवार तक सीमित रहते हुए बेटियों की पूजा कर रहे हैं। लेकिन, वहां पर भी नियमों का ध्यान नहीं रखा जा रहा हैं। जो कि कंजकों की स्वास्थ्य सुरक्षा के ²ष्टिगत से अच्छा नहीं हैं। मंगलवार को दुर्गा अष्टमी पर बहुत से घरों में कन्या पूजन किया गया। नवरात्र में व्रत रखने वालों ने कन्या पूजन के साथ अपने व्रत सम्पन्न किए। भक्तों ने हलवा, पूरी, चने व अन्य पकवान बनाकर भोग लगाया और मां का आशीर्वाद लिया। कंजक को विदा करते समय विभिन्न प्रकार के उपहार पाठ्य सामग्री भेंट की। आठवें नवरात्र पर मंदिरों में मां गौरी की पूजा श्रद्धा के साथ की गई। मां दुर्गा की पूजा करने से सुख व उत्तम फल की प्राप्ति होती है।

नवरात्र में कन्या पूजन का विशेष महत्व

बॉक्स : पं. पवन कौशिक ने बताया कि हिन्दू धर्म ग्रंथों के अनुसार नवरात्र में कन्या पूजन का विशेष महत्व है। मां भगवती का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए कन्याओं का सम्मान-पूजन बेहद जरूरी है। सनातन धर्म मे वैसे तो सभी बच्चों में ईश्वर का रूप माना जाता है। छोटी कन्याओं को मां का स्वरूप माना जाता हैं। जब नवरात्रों में माता पृथ्वी लोक पर आती है तो सबसे पहले कन्याओं में ही विराजित होती है।इनका सम्मान इन्हें आदर देना ही नवरात्र में माता की सच्ची उपासना है। कन्या पूजन करने से नवरात्र व्रत सम्पूर्ण होता है। कन्या पूजन के लिए दस वर्ष तक की नौ कन्याओं की पूजा की जाती हैं। पूरी,हलवा, खीर अन्य पकवान तैयार कर सबसे पहले मां दुर्गा को भोग लगाकर कंजकों को खिलाया जाता हैं। भोजन से पूर्व कन्याओं के पैर धोकर उनसे आशीर्वाद लिया जाता हैं। नवरात्र में मां की पूजा करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती है। हालांकि, मौजूदा समय में कोरोना का दौर हैं। इसलिए, स्वास्थ्य सुरक्षा के दृष्टिगत हमें अतिरिक्त ध्यान देना चाहिए।

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