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शाही अंदाज और बेमिसाल कद-काठी, बेरी के अश्व मेले में मारवाड़ी नस्ल का 'अश्वदेव' बना हर किसी की पसंद

Published: Fri, 16 Oct 2026 08:01 AM (IST)

बेरी के पारंपरिक अश्व मेले में भिवानी के स्वास्तिक स्टड फार्म का मारवाड़ी नस्ल का घोड़ा 'अश्वदेव' मुख्य आकर्षण का ...और पढ़ें

फोटो क्रेडिट: AI

फोटो क्रेडिट: AI

HighLights

  1. बेरी अश्व मेले में 'अश्वदेव' बना मुख्य आकर्षण

  2. मारवाड़ी नस्ल का यह घोड़ा 42 महीने का है

  3. इसकी ऊंचाई 68 इंच से अधिक, शाही चाल है

संवाद सूत्र, बेरी। धर्मनगरी बेरी में मां भीमेश्वरी देवी के पावन नवरात्र मेले के साथ लगने वाले पारंपरिक अश्व मेले में इस बार राजस्थान और हरियाणा की शान कहे जाने वाले घोड़ों की धूम मची हुई है।

मेले के बीच भिवानी जिले के कुहाड़ गांव स्थित स्वास्तिक स्टड फार्म का मारवाड़ी नस्ल का शानदार घोड़ा अश्वदेव इन दिनों मुख्य आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। अपनी शाही चाल, भीतर की ओर मुड़े खूबसूरत कानों और गठीले शरीर के कारण अश्वदेव जिधर से भी गुजरता है, हर किसी की निगाहें उसी पर टिक जाती हैं।

छोटी उम्र में ही महारथी कद-काठी

मारवाड़ी नस्ल के इस अनमोल घोड़े अश्वदेव की उम्र अभी महज 42 महीने (साढ़े तीन साल) है, लेकिन इसकी ऊंचाई 68 इंच से भी अधिक है। इतनी कम उम्र में इतनी भव्य कद-काठी देखकर पशु पालक और आम लोग दांतों तले उंगली दबा रहे हैं। मेले में पहुंचने वाले लोग इस खूबसूरत घोड़े के साथ सेल्फी लेने और उसकी खूबियों को करीब से निहारने के लिए खासे लालायित नजर आ रहे हैं।

जई, चना और दूध से होती है शाही परवरिश

अश्वदेव के मालिक सुधीर कुमार बताते हैं कि उनके फार्म पर कुल 13 घोड़े-घोड़ियां हैं, जिनमें अश्वदेव का स्थान सबसे खास है। वे इसे राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले के पदमपुर गांव से लेकर आए थे। सुधीर के अनुसार, अश्वदेव को एक परिवार के सदस्य की तरह पाला गया है।

इसके स्वास्थ्य और शरीर की बनावट को मेंटेन रखने के लिए रोजाना जई, चना और शुद्ध दूध जैसे पौष्टिक आहार दिए जाते हैं। मालिक के लिए यह सिर्फ एक मवेशी नहीं, बल्कि उनका सबसे अनमोल रत्न है।

सप्तमी-अष्टमी पर परवान चढ़ेगा पशु प्रेमियों का रोमांच

बेरी के इस ऐतिहासिक मेले में महासप्तमी और महाअष्टमी के अवसर पर देश के कोने-कोने से घोड़ा प्रेमियों और पशुपालकों का भारी हुजूम उमड़ता है।

इन खास दिनों में अश्व मेले की रौनक अपने चरम पर होगी, जहां बेहतरीन नस्लों के घोड़ों की खरीद-फरोख्त और उनकी कला का प्रदर्शन देखने को मिलेगा। अश्वदेव जैसी शानदारा नस्लें इस मेले की परंपरा और मारवाड़ी घोड़ों की विशेषता को नई ऊंचाइयां दे रही हैं।

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