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पत्नी के पेट में घोंपा था चाकू, बहादुरगढ़ के सनसनीखेज हत्याकांड में पति को उम्रकैद; कोर्ट का सख्त फैसला

Published: Wed, 04 Nov 2026 08:41 PM (IST)

झज्जर की अदालत ने बहादुरगढ़ में पांच साल पहले पत्नी की चाकू गोदकर हत्या करने वाले पति योगेश दुआ को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।

पत्नी की हत्या के मामले में दोषी को उम्रकैद।

पत्नी की हत्या के मामले में दोषी को उम्रकैद।

HighLights

  1. पति योगेश दुआ को आजीवन कारावास की सजा मिली

  2. जुलाई 2021 में पत्नी संगीता की चाकू मारकर हत्या की थी

  3. बहादुरगढ़ के संत कॉलोनी में हुई थी यह घटना

जागरण संवाददाता, झज्जर। बहादुरगढ़ के संत कॉलोनी में करीब पांच साल पहले पत्नी की चाकू गोदकर हत्या करने वाले एक मामले में जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने कड़ा फैसला सुनाया है।

न्यायाधीश राज कुमार यादव की अदालत ने दोष साबित होने पर पति योगेश दुआ को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत आजीवन कारावास और 10,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।

जुर्माना न भरने की स्थिति में दोषी को दो महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। इसके अलावा आर्म्स एक्ट के तहत भी दोषी को दो साल की कैद और पांच हजार रुपये जुर्माने से दंडित किया गया है।

यह है मामला

पुलिस थाना शहर बहादुरगढ़ में दर्ज के अनुसार, मृतका के बेटे अमन (निवासी संत कॉलोनी, बहादुरगढ़) ने पुलिस को दी शिकायत में बताया था कि 11 जुलाई 2021 की शाम करीब 8 बजे उसके पड़ोसी तरुण का फोन आया कि उसकी मां संगीता को उसके चाचा ब्रह्मशक्ति अस्पताल लेकर पहुंचे हैं।

जब वह अस्पताल पहुंचा, तब तक उसकी मां की मौत हो चुकी थी। जांच में सामने आया कि मृतका संगीता और उसके पति योगेश दुआ के बीच किसी बात को लेकर कहासुनी हो गई थी। गुस्से में आकर आरोपित योगेश ने घर के अंदर ही अपनी पत्नी के पेट में चाकू घोंप दिया और बीच-बचाव करने वाली बेटी को एक कमरे में बंद कर मौके से फरार हो गया था।

पुलिस ने इस संबंध में हत्या का मामला दर्ज कर त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी पति को गिरफ्तार किया था और मामला अदालत में पेश किया था। मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद जिला एवं सत्र न्यायाधीश राज कुमार यादव की अदालत ने आरोपी योगेश दुआ को दोषी करार दिया।

अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि आरोपित को सुनाई गई दोनों सजाएं (उम्रकैद और आर्म्स एक्ट के तहत कैद) साथ-साथ चलेंगी। साथ ही, मुकदमे की सुनवाई के दौरान विचाराधीन कैदी के रूप में जेल में बिताई गई अवधि को कुल सजा में समायोजित किया जाएगा।

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