- इसी बात से प्रेरित होकर अमन ने पढ़ने में लगाया मन, दो व्यक्तियों के मार्गदर्शन से जेईई एडवांस में पाई रैंक फोटो- 29, 30, 31, 32

जागरण संवाददाता, हिसार : अमन तिवारी ने जेईई एडवांस में 2154वीं रैंक हासिल की है, मगर यह रैंक हर किसी के लिए खास है। यह रैंक हर विद्यार्थी, परिवारों और समाज को एक सीख देती है। अमन तिवारी के पिता हरेंद्र तिवारी 13 वर्ष की उम्र में ही उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से हिसार काम की तलाश में आ गए थे। कुछ समय तक छोटे मोटे काम करने के बाद उन्होंने अग्रसेन भवन के सामने चाय की दुकान कर ली। इसके बाद परिवार बढ़ा तो हिमांशू, अमन और एक बेटी के पिता बने। पिता चाय की दुकान करते थे तो पढ़ाई के संसाधन कम और समस्याएं काफी बढ़ी थी। अमन बताते हैं कि बचपन में एक बार वह पिता की मदद के लिए चाय की रेहड़ी पर चले गए तो पिता ने घर भेज दिया कहा तुम पढ़ाई करो कुछ बनो यह मैं कर लूंगा। पिता की इसी बात से प्रेरित होकर अमन ने पढ़ाई शुरू कर दी। उनकी इस लगन को उमेश और पीयुष सर ने पहचान लिया। लिहाजा उमेश सर ने ठाकुरदार भार्गव सीनियर सेकेंडरी स्कूल में दाखिला करा दिया तो पीयुष सर ने अपनी कोचिग में हास्टल सुविधा के साथ अमन को तराशा, जिसका अब परिणाम सामने आया है।

गणित, फिजिक्स या केमिस्ट्री कौन सा विषय टापर्स की पसंद और परीक्षा में कैसे करता है मदद

1- टापर्स को पसंद गणित, मगर परीक्षा में केमिस्ट्री से शुरुआत

अमन बताते हैं कि 10वीं तक तय नहीं था कि इंजीनियरिग में जाना है। 10वीं पास करने के बाद एक स्ट्रीम चुननी थी, गणित में रुचि थी तो नान मेडिकल ले लिया। फिर हिसार में रहते हुए पीयुष सर ने कहा कि हास्टल में आकर रहो तो वहां जेईई की तैयारी शुरू कर दी। गणित पसंदीदा विषय है मगर फिर भी परीक्षा में सबसे पहले कैमिस्ट्री को पहले किया। क्योंकि कैमिस्ट्री स्कोरिग हिस्सा है। इसके बाद फिजिक्स और सबसे आखिर में गणित के प्रश्न हल किए। क्योंकि गणित को अतिरिक्त समय चाहिए होता है।

2- फिजिक्स लाजिकल, समय प्रबंधन अनिवार्य

हिसार में जेईई एडवांस में सर्वाधिक 474वीं रैंक लाने वाले कुशाग्र गोयल पुत्र डा. पुनीत गोयल अब आईआईटी दिल्ली में इलेक्ट्रिकल स्ट्रीम में पढ़ाई करेंगे। वह बताते हैं कि आईआईटी में दाखिले को लेकर विद्यार्थी काफी प्रेशर में रहते हैं। मैंने बिना चिता के परीक्षा दी और सफलता मिली। विद्यार्थी भी यही फार्मूला अपनाएं। मैंने परीक्षा में सबसे पहले फिजिक्स के प्रश्न किए। 60 मिनट फिजिक्स को, 40 मिनट में कैमिस्ट्री और 1 घंटा 20 मिनट गणित के प्रश्नों को दिए। फिजिक्स लाजिकल है इसलिए मैंने सबसे पहले फिजिक्स को समय दिया।

3- गणित कमोजर था तो फिजिक्स केमिस्ट्री को बना लिया हथियार

सेक्टर 13 निवासी यशवीर यादव पुत्र कंवर सिंह यादव नवीं कक्षा से ही संकल्प एकेडमी में जेईई की तैयारी में जुटे थे। उन्होंने अब ओबीासी श्रेणी में 647वीं रैंक हासिल की है। उन्होंने बताया कि गणित विषय कमजोर था तो अपनी तैयारी में फिजिक्स और केमिस्ट्री की इतना मजबूत किया कि कहीं से भी प्रश्न आ जाए उसे हल कर दिया करता था। ऐसे में गणित में औसत नंबर आएं फिर भी फिजिक्स केमिस्ट्री जेईई को क्रेक करा ही देंगे। परीक्षा में यही किया और उत्तीर्ण की। विद्यार्थी किसी भी कीमत पर हार न मानें वह प्रयास करते रहें रास्ता अपने आप ही बन जाता है।

4- लगातार प्रैक्टिस आपको करती है मजबूत

सिरसा के नारायण खेड़ा निवासी ईशांत सिहाग पुत्र राम प्रताप सिहाग पिछले दो वर्षों से हिसार में रहकर जेईई की तैयारी कर रहे थे। उन्होंने 1611वीं रैंक हासिल की है। केएल आर्य डीएवी पब्लिक स्कूल के छात्र ईशांत बताते हैं कि जब आप समय प्रबंधन सीख जाते हैं फिर आपको अधिक से अधिक टेस्ट देने चाहिए। बार-बार प्रैक्टिस करते रहने से आपको सब कुछ रीकाल रहेगा। अगर बीच में प्रैक्टिस छोड़ दी तो हो सकता है कई विषय आपके कमजोर हो जाएं। स्टडी मेटेरियल पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।

Edited By: Jagran