हिसार, जेएनएन। हिसार के माइकल और हंटर दो विभागों के आपसी तालमेल के अभाव में सरकारी पहचान से वंचित हो गए हैं। उनका मालिक अक्षय मलिक उन्हें पहचान दिलाने के लिए एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय तक भटक रहा है। पशुपालन विभाग और नगर निगम दोनों विभागों के अफसर इन दोनों बेहतर नस्ल के कुत्तों का पंजीकरण करने की बजाए, एक दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं। जिस कारण इन कुत्तोंं का मालिक व्यवसायी अक्षय उनका पंजीकरण करवाने में सफल नहीं हुआ और अब विभाग की ओर से पंजीकरण कौन करेगा इसके फाइनल फैसले के इंतजार में है।

आठ जनवरी 2020 को महानिदेशक पशुपालन एवं डेयरी विभाग हरियाणा ने एक पत्र जारी किया था। जिसमें शहरी स्थानीय निकाय विभाग और निदेशक पशुपालन एवं डेयरी विभाग को कुत्तों के पंजीकरण के संबंध में आदेश जारी किए थे। लेकिन वे आदेश स्पष्ट नहीं थे। जिस कारण दोनों ही विभाग पंजीकरण से अपनी जिम्मेदारी झाडऩे में लगे हुए हैं। ऐसी स्थिति में कुत्ते पालने के शौकीन लोग उनका पंजीकरण नहीं करवा पा रहे हैं।

35 साल से पाल रहे कुत्ते

सेक्टर-15ए निवासी ऑटो मोबाइल व्यवसायी अक्षय मलिक ने बताया कि कई साल से उनका परिवार कुत्ते पालते आ रहा है। इनके प्रति उनका प्रेम है। कुत्ते उनके परिवार का हिस्सा हैं। अक्षय के पास फिलहाल दो नस्ल के कुत्ते हैं जिसमें एक लब्राडोर डॉग जिसका नाम माइकल है और दूसरा रॉटविलर डॉग जिसका नाम हंटर है। अक्षय ने बताया कि 28 अक्टूबर 2014 में भी उस समय हमारे पास जो कुत्ते थे उनका पंजीकरण करवाया था।

पहले ऐसे होता था पंजीकरण

अक्षय मलिक ने बताया कि पहले निगम पंजीकरण करता था। उन्होंने 28 अक्टूबर 2014 को अपने दो पालतु कुत्तों का 500-500 रुपये देकर पंजीकरण करवाया था। जिसमें निगम ने उन्हें दो टोकन 22 नंबर और 23 नंबर दिया। कुत्तों की नस्ल रसीद में लिखी जाती थी। उनकी फोटो भी जमा करवाई जाती थी। उसी कड़ी में अप्लिकेशन सहित दोनों कुत्तों की फोटो लेकर दोनों विभागों में गए लेकिन किसी ने भी पंजीकरण नहीं किया।

लेब्रा डॉग व जर्मन शेफर्ड पालने के हिसार में हैं शौकिन

कुत्ते पालने के शौकीन लोगों की बात करें तो हिसार के लोगों के मनपंसद कुत्तों में लेब्राडॉग शामिल है। इसके बाद ही जर्मन शेफर्ड, पग और रॉटविलर शामिल हैं। काफी समय पहले शहर में वल्र्ड रैबीज डे पर जब टीकाकरण कार्यक्रम आयोजित किया तो उसमें लेब्रा नस्ल के कुत्तों की संख्या अधिक थी। ये कुत्ते समझदार होते हैं और सूंघने की शक्ति भी बेहतर होती है। इसके अलावा साधारण डाइट से भी इनका पालन हो जाता है। जिससे इनको पालने का खर्च भी कम रहता है। इसके अलावा सुरक्षा की दृष्टि से लोग जर्मन शेफर्ड पालना पसंद करते हैं। इसके अलावा देसी कुत्ते को पालने के शौकिन भी शहर में मौजूद हैं।

-----पंजीकरण के बारे में जानकारी मिलने पर मैंने स्टाफ को पंजीकरण रजिस्ट्रर बनाने के आदेश दिए हैं। फिलहाल इन कुत्तों के पंजीकरण के लिए आने वालों का रिकार्ड तो दर्ज किया जाएगा।

- जेके अभीर, कमिश्नर, नगर निगम हिसार।

Posted By: Manoj Kumar

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