जेएनएन, हिसार। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने एक बार फिर पूर्व मुख्‍यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर निशाना साधा। मनोहरलाल ने कहा कि हम तो हुड्डा सरकार के पाप धो रहे हैं। आठ साल पहले मिर्चपुर में हुई घटना अब तक दुर्घटना बनी हुई है। इसे लेकर पूर्व मुख्यमंत्री ने राजनीति के सिवाय कोई काम नहीं किया है।

वह गांव ढंढूर में मिर्चपुर से विस्थापित हुए परिवारों के लिए पुनर्वास योजना का शुभारंभ करने के बाद लोगों को संबोधित कर रहे थे। सीएम मनोहरलाल ने कहा कि मिर्चपुर की घटना पर सिर्फ राजनीति की गई। उस समय की हुड्डा सरकार ने इस दिशा में सही कदम नहीं उठाया। उस समय हम विपक्ष में थे, लेकिन इसका समाधान करने के लिए अपना प्रयास जारी रखा। हमने दोनों पक्षों से बातचीत कर कई फॉर्मूले भी निकाले और समस्या का समाधान किया। वह

हुड्डा सरकार में आठ साल पहले हुई घटना अब तक बनी है दुर्घटना

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब हमने देखा कि इस समस्या का समाधान केवल इन लोगों का पुनर्वास ही है तो मौजूदा सरकार ने भाजपा के प्रेरणा स्रोत पंडित दीनदयाल उपाध्याय की सोच के अनुरूप गांव ढंढूर में मिर्चपुर विस्थापितों के पुनर्वास करने का निर्णय लिया।

मिर्चपुर से विस्‍थापित लोगों के लिए पुनर्वास योजना का शुभारंभ करते सीएम मनोहरलाल।

मुख्यमंत्री ने कहा कि घटनाएं घट जाया करती हैं, लेकिन बाद में उसकी जिम्मेदारी किसी न किसी पर जरूर डाली जाती है। समय के अनुसार उन्हें ठीक करने का काम करना चाहिए, लेकिन इस घटना के चार साल बाद भी पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कोई समाधान नहीं किया। आज हमने 258 परिवारों को जगह देकर बसाने की योजना बनाई है।

उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र का नाम दीनदयाल पुरम रखा जाए। इस क्षेत्र में एक पार्क भी विकसित किया जाए, जिसका नाम भी पंडित दीनदयाल उपाध्याय पार्क रखा जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि हम सभी को मिलकर चलना होगा। वर्ष 2020 तक कोई भी परिवार ऐसा नहीं होगा, जिसके पास छत नहीं होगी।

आपके यहां बस जाने के बाद तंवर की यहीं रुकेगी साइकिल

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री कृष्ण बेदी ने कहा कि जब यहां मिर्चपुर वासियों के लिए घर बन जाएंगे तो यहां कभी चौटाला परिवार के लोग आएंगे तो कभी यहां अशोक तंवर की साइकिल रुकेगी, तो कभी कुमारी सैलजा बालों में हाथ फेरते हुए वोट मांगने पहुंचेंगी। बस आप लोग यहां बस तो जाएं।

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अप्रैल 2010 में 250 दलित परिवारों ने किया था पलायन

मिर्चपुर कांड के पीडि़तों को आठ साल बाद रहने के लिए छत मिल जाने के बाद पलायन करने वाले 258 अनुसूचित जाति के परिवारों की जिंदगी पटरी पर लौटेगी। हिसार के मिर्चपुर गांव में 21 अप्रैल 2010 को दो समुदायों के बीच भड़की हिंसा में दर्जनों घरों को आग के हवाले कर दिया गया और वहां जमकर लूटपाट मचाई गई थी। आगजनी में 70 वर्षीय दलित ताराचंद व उनकी अपाहिज बेटी सुमन जिंदा जल गए थे।

हिंसा में पुलिस ने 100 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया था। दंगों के बाद अनुसूचित जाति के 258 परिवार वहां से पलायन करके चले गए। मिर्चपुर से पलायन करके जाने वाले अनुसूचित जाति के परिवार पहले कभी दिल्ली तो कभी भिवानी में रहे और बाद में हिसार के निकट तंवर फार्म में इन्होंने अपना अस्थायी आशियाना बना लिया। सरकार और प्रशासनिक अधिकारियों के प्रयास के बावजूद ये परिवार पिछले आठ सालों से मिर्चपुर जाने को तैयार नहीं थे।

इस बीच, अदालत ने हरियाणा सरकार को इन परिवारों के पुनर्वास के निर्देश जारी किए, जिसके बाद अब प्रदेश सरकार ने इन अनुसूचित जाति के परिवारों को मिर्चपुर के निकटवर्ती गांव ढंढूर में आठ एकड़ चार कनाल भूमि पर 100-100 वर्ग गज के प्लाट दिए हैं। एक प्लाट की औसतन कीमत 1.77 लाख रुपये है। सरकार ने इन प्लाटों में बिजली, पानी एवं नालियों की व्यवस्था कराई है। सरकार द्वारा प्लाट दिए जाने के बाद ही पीडि़त परिवार नए स्थान पर बसने को तैयार हुए।

Posted By: Sunil Kumar Jha

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