झज्जर, जेएनएन। हिंदू परम्परा में एकादशी को पुण्य कार्य और भक्ति के लिए महत्वपूर्ण माना जाता हैं। वैसाख मास कृष्ण पक्ष की एकादशी को वरुथिनी एकादशी कहा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के वामन अवतार की पूजा की जाती हैं। पुराणों में इस एकादशी का बहुत महत्व बताया गया है। यह पुण्य और सौभाग्य प्रदान करने वाली एकादशी है। मान्यता है कि इस एकादशी का व्रत करने से विष्णु भगवान हर संकट से भक्तों की रक्षा करते हैं।

यह बात विद्वान पं. ज्योतिषाचार्य श्रीभगवान कौशिक ने कही। उन्होंने बताया कि वरूथिनी एकादशी का उपवास करने से मानसिक शांति मिलती है। इस व्रत को करने से सुख प्राप्त होता हैं। वरुथिनी एकादशी को कष्टमुक्ति के लिए प्रभावी माना गया है। एकादशी एक धार्मिक दिवस है, इस दिन को धार्मिक कर्म में मन लगाना चाहिए। पूजन के दौरान ऊं नमो भगवत वासुदेवाय नम: मंत्र का जप करते रहे।

इस दिन जो भक्त सच्चे मन से उपवास करता है उसके दु:खो का अंत होता है और घर-परिवार में सुख-शांति और समृद्धि का वास होता है। एकादशी का व्रत संयम पूर्वक किया जाता हैं। जो भी व्यक्ति इस दिन व्रत करता है, भगवान विष्णु उसकी हर संकट से रक्षा करते हैं। इस दिन सूर्योदय से पहले सुबह थोड़ा गंगा जल पानी मे डालकर स्नान करना चाहिए। इस दिन खरबूजे का भोग लगाएं और पूरे दिन भगवान विष्णु का स्मरण करें।

इस व्रत को रखने वाले को उस दिन अन्न का सेवन नहीं करना चाहिए और फलाहार ही करना चाहिए। भगवान नारायण को तुलसी बहुत प्रिय है, इसलिए उन्हें तुलसी जल भी समर्पित करना चाहिए। एकादशी व्रत की कथा सुने या पढ़े। वरुथिनी एकादशी का उपवास शुक्रवार 7 मई को रखा जाएगा। इस दिन नमक का इस्तेमाल करने से भी परहेज करना चाहिए।