हिसार [वैभव शर्मा] कौन कहता है आसमां में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबियत से उछालो... यह लाइनें लद्दाख के गया गांव निवासी उरगेन फुनसोग पर सटीक बैठती है। 48 वर्षीय उरगेन अपने गांव में 40 कनाल भूमि पर जैविक खेती कर सब्जियां उगाते हैं। उरगेन 18 हजार फीट ऊंचाई पर एक दो नहीं बल्कि कई आर्गेनिक सब्जियां लगा चुके हैं। खास बात है कि इनकी आर्गेनिक सब्जियों से बने पकवान विदेशी भी काफी चाव से खाते हैं।

पीएम नरेंद्र मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में उरगेन के जैविक खेती के मॉडल का जिक्र किया तो अचानक से वह सुर्खियों में आ गए हैं। खास बात यह है कि जब पीएम मोदी उनका जिक्र रेडियो कार्यक्रम में कर रहे थे तब उरगेन हरियाणा के हिसार में मौजूद थे। वह जैविक खेती के साथ अब केंद्रीय भेड़ प्रजनन फार्म में भेड़ों, बकरियों व मुर्गियों के प्रबंधन को सीखने आए हैं। ताकि भेड़ पालन व्यवसाय से भी आय कर सकें। उरगेन के यहां तक पहुंचने की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं है। इससे आम किसान प्रेरणा ले सकते हैं।

पिता की मृत्यु के बाद 16 वर्ष की उम्र में शुरू की खेती

उरगेन बताते हैं कि 13 वर्ष की उम्र में पेट के कैंसर से पिता दोरजे का मृत्यु हो गई। तब उनके पास घर पर मां, एक भाई और एक बहन की जिम्मेदार थी। उस समय परिवार ने भेड़ पालन आदि कर काफी कठिन समय काटा। कुछ वर्ष बाद उन्हें खेती में कुछ अलग करने की इच्छा उठी। लिहाजा वह पंजाब, हिमाचल प्रदेश, नई दिल्ली में स्थित कृषि शिक्षण व अनुसंधन संस्थानों में खेती के मॉडल को समझने गए। इसके बाद लेह में शेर ए कश्मीर विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान केंद्र से वर्मी कंपोस्ट, डीकंपोज बनाने की प्रक्रिया सीखी। इसे बाद कुछ समय तक लेह में जैविक खाद खुद तैयार कर बेचकर भी कामाई की। इसके बाद भी वह रुके नहीं।

घर को बनाया टूरिस्ट आश्रय स्थल खिलाईं अपनी उगाई सब्जियां

लद्दाख में सब्जियां बाहर से आती हैं, ऐसे में उरगेन ने कैंचुआ खाद लगाकर अपने खेत में आर्गेनिक सब्जियों को उगाना शुरू की। तो काफी अच्छी पैदावार मिलने लगी। वह अब तक प्याज, मूली, राजमा, ब्रोकली, सभी गोभी, शलगम, साग, सौंफ, मक्का, तरबूज, स्ट्राबेरी, पुदीना सहित कई सब्जियां उगा चुके हैं। लद्दाख में जो पर्यटक रिसर्च व घूमने आते हैं उन्हें वह अपने घर में रुकवाते हैं। उन्हें अपने खेत की आर्गेनिक सब्जियां व फल खिला कर अच्छी कमाई कर रहे हैं।

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