भिवानी, जेएनएन। गुरुग्राम में करोड़ों रुपये के प्लाट को हड़पने के लिए साथी डॉक्टरों से मिलकर नकली चोट की एमएलआर कटाकर साझेदार के खिलाफ हमले का झूठा केस दर्ज कराने के मामले में अदालत ने दो डॉक्टरों को दो-दो साल कैद की सजा सुनाई है।

अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश हर्षाली की अदालत ने दोषी डॉक्टरों पर दो-दो हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना राशि अदा ना किए जाने पर दोषियों को अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।

पीडि़त पक्ष की तरफ से पिछले नौ साल से न्याय की लड़ाई लड़ रहे एडवोकेट हरदीप सिंह सुंदरी ने बताया कि भिवानी के गांव केलंगा का निवासी प्रहलाद सिंह हिसार सामान्य अस्पताल में अकाउंटेंट के पद पर कार्यरत था। उसकी भिवानी के सामान्य अस्पताल में तैनात डा. दारा सिंह से उसी समय से दोस्ती थी जब वह भिवानी में सामान्य अस्पताल में क्लर्क था।

वर्ष 2004 में दोनों ने मिलकर गुरुग्राम में हुडा का प्लाट अप्लाई किया था। 2007 में यह प्लाट डा. दारा सिंह के नाम पर निकल आया। इस बीच प्रहलाद सिंह पदोन्नत होकर हिसार के सरकारी अस्पताल में अकाउंटेंट के पद पर लग गया। आरोप था कि प्लाट अधिक कीमत का होने के कारण डाक्टर दारा सिंह की नीयत में फर्क आ गया और उसने प्लाट हड़पना चाहा। इसी बात को लेकर दोनों में विवाद हो गया।

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एडवोकेट हरदीप सिंह ने बताया कि डा. दारा सिंह ने प्लाट पर प्रहलाद सिंह का हक होने से इंकार करते हुए उस पर हमला कर चोट मारने का आरोप लगाया।  डा. दारा सिंह ने डा. आरपी शर्मा व डा. एडविन को भी अपने साथ मिला लिया। तीनों डाक्टरों ने मिलकर दारा सिंह को नकली चोट दिखाकर एमएलआर काट दी और प्रहलाद पर झूठा केस बनवा दिया। इस मामले में अदालत ने डा. एडविन को निर्दोष करार देते अन्य दोनों डॉक्टरों  दारा सिंह और डा.आरपी शर्मा को दो साल की कैद एवं दो-दो हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।

Posted By: Manoj Kumar

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