संवाद सहयोगी, हांसी : सिविल अस्पताल में तैनात 26 एनएचएम कर्मचारियों की सेवाएं सरकार द्वारा समाप्त करने के बाद उपमंडल में स्वस्थ्य सेवाएं चरमरा गई हैं। जच्चा-बच्चा व आपातकालीन एंबुलेंस सेवा भी प्रभावित है। दुर्घटनाओं में घायलों को लाने के वाली एंबुलेंस देरी से पहुंच रही हैं। नर्सों व लैब स्टाफ की कमी के चलते सीएचसी व पीएचसी में भी स्वास्थ्य सेवाओं पर बुरा असर पड़ रहा है। सिविल अस्पताल में डिलीवरी केस आने भी कम हो गए हैं। स्वास्थ्य सेवाएं को सुचारु बनाए रखने के लिए विभाग ने नियमित स्टाफ की छुट्टियों को रद्द कर दिया है।

बता दें कि सरकारी अस्पताल में करीब 26 एनएचएम कर्मचारी नियुक्त है। सभी 5 फरवरी से हड़ताल पर चल रहे हैं। सरकार ने पिछले हफ्ते सभी की सेवाएं समाप्त कर दीं। सिविल अस्पताल में 8 नर्स, दो एएनएम नर्स, 5 एमपीएचडब्यू, एक अकाउंटेंट व कंप्यूटर ऑपरेटर, 6 लेबर कर्मचारी एनएचएम के तहत नियुक्त हैं। इनके हड़ताल पर होने की वजह से सरकारी अस्पताल में नागरिकों को स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल पा रही है। एनएचएम की हड़ताल का सबसे अधिक असर प्रसूता विभाग में दिख रहा है। यहां लेबर रूम में नर्सों की कमी है और डिलीवरी केस आने कम हो गए हैं। क्योंकि किलकारी एंबुलेंस के अभाव में आशा वर्कर ग्रामीण क्षेत्र से डिलीवरी केस सिविल अस्पताल नहीं ला पा रही हैं। वर्जन::::::::::::

सरकार द्वारा हड़ताल पर गए सभी एनएचएम कर्मचारियों को टर्मिनेट कर दिया है। फिलहाल डॉक्टर मोनिका अस्पताल में सेवाएं दे रही है। करीब 25 कर्मचारियों का स्टाफ कम हो गया है। मगर जितना स्टाफ है उससे सेवाएं ली जा रही है। अस्पताल प्रशासन पूरा प्रयास कर रहा है कि मरीजों को किसी प्रकार की परेशानी ना आए।

- डा. अरुणा गर्ग, एसएमओ।

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