जागरण संवाददाता, रोहतक। टोक्यो ओलंपिक्स में पदक की उम्मीदों को झटका लगा है। रोहतक के मुक्केबाज अमित पंघाल का ओलंपिक में सफर खत्म हो गया है। अपने डेब्यू ओलंपिक मैच में अमित पंघाल को हार का सामना करना पड़ा है। अमित के पिता ने हार के पीछे कोच न मिलने को कारण बताया है। साथ ही कहा कि मनोवैज्ञानिक की भी कमी खली। इस हार के बाद निजी कोच न देने को लेकर फिर विवाद खड़ा हो गया है। 

अमित की हार के बाद पिता विजेंद्र ने उनसे फोन पर बात की। पिता ने उन्हें हतोत्साहित न होने को कहा। अमित से पिता विजेंद्र ने दैनिक जागरण के साथ बातचीत में कहा कि अमित को निजी कोच की सख्त जरूरत थी। कोच की डिमांड बार-बार की। प्रधानमंत्री तक चिट्ठी लिखी। आग्रह करने के बावजूद भी अमित को कोच नहीं दिया गया। यह अमित के हारने का बड़ा कारण रहा है। उन्होंने कहा कि अमित एक साल से निजी कोच की डिमांड कर रहा था। कई खिलाड़ियों को निजी कोच उपलब्ध भी करवाया गया। लेकिन अमित को कोच नहीं दिया। शायद इसी दबाव में अमित अपना शत प्रतिशत प्रदर्शन नहीं कर पाए। 

 

टोक्यो ओलंपिक में हार के बाद मुक्केबाज अमित पंघाल से फोन पर बात करते पिता विजेंद्र।

अमित के पिता विजेंद्र ने कहा कि अमित को 10 दिन से किसी ने प्रैक्टिस नहीं कराई थी। अपने आप ही प्रैक्टिस कर रहा था। पहले कभी ऐसा नहीं हुआ कि मुकाबले के दौरान अमित की सांस चढ़ने लगे। जाहिर है प्रैक्टिस की कमी इसका बड़ा कारण रही। साथ ही कोच न मिलने की वजह से तनाव और दबाव महसूस कर रहा था अमित।

18 जुलाई से प्रैक्टिस नहीं कर पाया था अमित

अमित पंघाल के पिता विजेंद्र के मुताबिक, 18 जुलाई के बाद अमित प्रैक्टिस ही नहीं कर पाया। कोच साथ होते तो पूरी उम्मीद थी कि पदक आता। पहले राउंड में बढ़त से खुश थे। दूसरे राउंड में थकान दिखी। तीसरे राउंड में हाथ नहीं उठा। तीसरे राउंड में साफ हो गया कि अमित की हार हो जाएगी। अमित पहले राउंड में आराम से खेलता था। और दूसरे और तीसरे राउंड में हमेशा अटैकिंग होता था। अमित ने ओलंपिक चैंपियन को भी 3-2 से टक्कर दी थी। साफ है कि यहां कोच नहीं होना अमित की हार का कारण।

मनोवैज्ञानिक की भी कमी खली

पिता और भाई ने ऐसा बताया कि कोच के साथ मनोवैज्ञानिक की भी कमी खली। रूम मेट मनीष कौशिक हारकर बाहर हो गए। पड़ोस के विकास कृष्णन भी हार के बाद लौट आए थे। इसके बाद अमित अकेले पड़ गए थे। न ही आर्मी के कोच जय पाटिल को भेजा गया, जिनकी मनीष ने मांग की थी। जो कोच गए थे, उन्होंने भी ज्यादा टाइम नहीं दिया। एक विदेशी कोच, जिसे हिंदी नहीं आती। दूसरा कोच कन्नड़ बोलते हैं। एक दिन पहले वजन कम करना भी हार का कारण बना। शरीर में कमजोरी आ गई थी। अगर कोच साथ होते तो दो दिन पहले वजन कम करवा देते। इससे थकान नहीं होती

 

अमित का मैच देखने के लिए स्वजन और लोग एलईडी के सामने डटे थे। हार के बाद निराश नजर आए।

गांव में छाई निराशा

मुकाबले को लेकर अमित के पैतृक गांव मायना में काफी उत्साह था। अमित का मैच देखने के लिए सुबह से ही स्वजन और गांव वाले एलईडी के सामने डटे थे। सबको उम्मीद थी कि अमित प्रतिद्वंद्वी मुक्केबाज को हराएगा। लेकिन मैच में हार के बाद निराशा छा गई। निराशा और हताशा स्वजनों के चहरे पर साफ झलक रही थी।

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Edited By: Umesh Kdhyani