मीठी ठंड में बिगड़ी हरियाणा की हवा, 310 AQI के साथ सबसे प्रदूषित रहा कैथल; गुरुग्राम समेत 7 शहर खराब श्रेणी में
नवंबर की शुरुआत के साथ ही हरियाणा के कई शहरों में हवा की गुणवत्ता चिंताजनक स्तर पर पहुंच गई है। ...और पढ़ें

मीठी ठंड में बिगड़ी हरियाणा की हवा। फोटो जागरण
HighLights
कैथल 310 एक्यूआई के साथ हरियाणा का सबसे प्रदूषित शहर।
गुरुग्राम, अंबाला सहित सात शहरों की हवा खराब श्रेणी में।
पराली जलाने और निर्माण कार्यों पर भी नियंत्रण के प्रयास।
जागरण टीम, हिसार/पानीपत। नवंबर की शुरुआत के साथ सुबह-शाम ठंड का असर बढ़ रहा है। दोपहर में भी मीठी ठंड है। इस बीच प्रदेश के कई शहरों में हवा की गुणवत्ता चिंता बढ़ा रही है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के दो नवंबर की शाम चार बजे तक वायु गुणवत्ता आंकड़ों के अनुसार, कैथल 310 के सूचकांक के साथ प्रदेश में सबसे प्रदूषित शहर रहा।
अंबाला का एक्यूआइ 285 और गुरुग्राम का 246 दर्ज किया गया। कुरुक्षेत्र, पंचगांव, मानेसर और यमुनानगर में भी हवा खराब श्रेणी में रही। हिसार का सूचकांक 184, रोहतक का 174 और सोनीपत का 161 दर्ज किया गया।
वहीं, पानीपत में एक्यूआइ 84 और करनाल में 47 रहा। बहादुरगढ़ और जींद में भी हवा प्रदूषित हैं। इसके अलावा प्रदेश में कैथल समेत सात शहर ऐसे हैं जहां हवा खराब श्रेणी में पहुंच गई है। इनमें अंबाला, गुरुग्राम, कुरुक्षेत्र, पंचगांव, मानेसर और यमुनानगर शामिल हैं।
सबसे प्रदूषित शहर
शहर एक्यूआइ
- कैथल 310
- अंबाला 285
- कुरुक्षेत्र 258
- गुरुग्राम 246
- पंचगांव 214
- मानेसर 211
- यमुनानगर 208
प्रदूषण स्तर में मध्यम स्तर श्रेणी वाले शहर
शहर एक्यूआइ
- हिसार 184
- रोहतक 174
- सोनीपत 161
- सिरसा 130
- भिवानी 112
- फतेहाबाद 111
पानीपत और करनाल में स्थिति बेहतर
प्रदेश के कुछ शहरों में वायु गुणवत्ता अपेक्षाकृत बेहतर रही। पानीपत का एक्यूआइ 84 दर्ज किया गया, जो संतोषजनक श्रेणी में है। करनाल में सूचकांक 47 रहा, जो अच्छी श्रेणी में आता है। पलवल में भी एक्यूआइ 41 दर्ज किया गया। फरीदाबाद का सूचकांक 115 रहा, जो मध्यम श्रेणी में है।
लंबे समय तक प्रदूषित हवा में रहना खतरनाक रोहतक पीजीआइएमएस के मेडिसन विभाग के अध्यक्ष डा. दीपक जैन के अनुसार, मध्यम श्रेणी की हवा भी फेफड़ों, अस्थमा और हृदय रोग से पीड़ित लोगों को सांस लेने में परेशानी दे सकती है।
खराब श्रेणी की हवा में लंबे समय तक रहने से अधिकतर लोगों को सांस संबंधी दिक्कत हो सकती है। बहुत खराब श्रेणी में लंबे समय तक संपर्क रहने पर श्वसन संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ता है। ऐसे में प्रदूषण से प्रभावित शहरों में बच्चों, बुजुर्गों और सांस के रोगियों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
अब पराली भी पकड़ रही आग
छह किसानों पर हो चुकी एफआइआर हरियाणा के जिलों में पराली जलाने के मामलों में अलग-अलग स्थिति है। यमुनानगर में तीन मामलों में एफआइआर दर्ज हो चुकी हैं। वहीं जींद में भी करीब पौने छह एकड़ में पराली जलाने पर तीन किसानों के खिलाफ केस दर्ज किए गए हैं। सिरसा में एक और रोहतक के धामड़ गांव में भी एक मामला दर्ज हुआ है।
हांसी में सेटेलाइट से मिली दो लोकेशन की जांच में गढ़ी गांव में पराली जलाने की पुष्टि हुई। किसान पर पांच हजार रुपये जुर्माना लगाकर एफआइआर के लिए शिकायत दी गई है। लापरवाही पर वन बीईओ और कृषि सुपरवाइजर को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।
भिवानी, चरखी दादरी में इस सीजन में पराली जलाने का कोई मामला नहीं मिला। पानीपत में भी पराली जलाने का मामला सामने नहीं आया, हालांकि बराना गांव में 22 अक्टूबर को बिजली लाइन में स्पार्किंग से पराली के अवशेष जल गए थे। जींद में कम हवा की गति के बीच पांच से 20 नवंबर तक आपात सेवाओं से जुड़े निर्माण कार्यों को छोड़कर बाहरी निर्माण पर रोक लगाई गई है।
देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।