संवाद सहयोगी, हांसी : ऐसी दोस्ती भी कम देखने का मिलती है कि दोस्त की मौत के बाद उसके सपने को पूरा करने के लिए उसके दोस्तों ने दिन रात एक कर दिया हो। इच्छा भी ऐसी कि प्रत्येक ग्रामीण को इसका लाभ मिल सके। थुराना गांव में ऐसी दोस्ती की मिसाल देखने को मिली है। गांव के अरविद की दिसंबर 2012 में सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। अरविद का गांव में लाइब्रेरी स्थापित करने का सपना था। कुछ समय बाद ही विभिन्न रक्षा, पुलिस व सरकारी सेवाओं में तैनात गांव के साथियों ने अपने साथी अरविद के सपने को साकार करने के लिए गांव को आदर्श बनाने के के लिए एक रोडमैप पर डिस्कशन किया। अरविद के दोस्तों ने एक टीम का गठन टीडब्ल्यूए के नाम से किया। इस संस्था से टीम ने 2017 में शिक्षा पर्यावरण संरक्षण व सामाजिक कल्याण के कार्य करने शुरू कर दिए। 2017 में टीम ने काम करना शुरू किया। 2 जनवरी 2018 को गांव में एक लाइब्रेरी की स्थापना की गई।

अब पिछले पांच वर्षों से सैकड़ों विद्यार्थी इस लाइब्रेरी में अध्ययन करते हैं जो कि सभी सुविधाओं से युक्त है। लाइब्रेरी में अध्ययन करके 15 से अधिक युवा सरकारी सेवाओं में चयनित हो चुके हैं। लाइब्रेरी में बोर्ड कक्षाओं व प्रतियोगी परीक्षाओं, नवोदय विद्यालय के लिए निशुल्क कोचिग की व्यवस्था भी करती है। लाइब्रेरी से सुपर -100 व आइआइटी प्रवेश परीक्षा में चयन भी हुए हैं। टीम टीडब्ल्यूए ने नशे से दूर रखने के लिए नशा छोड़ो योग अपना और सम्मान पाओ योजना भी शुरू की है।

गांव के इन युवाओं की टीम पर्यावरण संरक्षण के लिए 2017 से हर वर्ष गांव में अपने खर्च पर हजारों पौधे लगाते हैं। दिल्ली पुलिस में हेड कांस्टेबल के पद पर तैनात संदीप पान्नू हर वर्ष छुट्टी लेकर अपने साथियों के सहयोग से हजारों पौधे लगाने का काम करते हैं। पिछले वर्षों में 10 हजार से अधिक पेड़ों को निश्शुल्क वितरित व रोपित किए गए है। टीम ने गांव की सार्वजनिक जगह पर एक हजार से ज्यादा छोटे पौधों को सफल पेड़ बनाया है। टीम द्वारा रक्तदान, पक्षियों को पानी पीने के लिए हर वर्ष 101 जल कुंडे , दीपावली के शुभ अवसर पर फौजी भाइयों के परिवारों के साथ दिवाली सेलिब्रेशन, फ्री मेडिकल कैंप, महिला उत्थान व ग्राम वासियों के सामाजिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। टीम के सभी साथी सामाजिक कल्याण की इस मुहिम को आगे बढ़ाने में अपना आर्थिक सहयोग देते हैं।

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